राम ही तीनों लोक के राजा।
सबके प्रतिपाला सबके आधार,
राम दरबार है जग सारा।
रामराज्याभिषेक के उत्सवी माहौल का रामायण धारावाहिक में फिल्माया गया यह दृश्य बुधवार को हकीकत में अयोध्यावासी जीएंगे। त्रेतायुग में प्रभु राम ने उन्हें 14 साल इंतजार कराया था। अब वैसी ही खुशी कलियुग में 492 वर्ष बाद मिल रही है, जब 5 अगस्त से श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का विशाल मंदिर आकार लेने जा रहा है।
नारि कुमुदिनीं अवध सर, रघुपति बिरह दिनेस। अस्त भएं बिगसत भईं, निरखि राम राकेस॥
स्त्रियां कुमुदिनी हैं, अयोध्या सरोवर है और श्री रघुनाथजी का विरह सूर्य है (इस विरह सूर्य के ताप से वे मुरझा गई थीं)। अब उस विरह रूपी सूर्य के अस्त होने पर श्रीराम रूपी पूर्णचन्द्र को निरखकर वे खिल उठी हैं।
यह बात महादेव ने त्रेतायुग में प्रभु राम के वनवास से लौटने पर अयोध्यावासियों के अभूतपूर्व उत्साह, उमंग और भक्ति को देखकर माता पार्वती से कही थी। तब शायद किसी ने कल्पना न की हो कि द्वापर के बाद कलियुग आएगा, तो सबके प्रतिपाला सबके आधार का दरबार सजने की प्रतीक्षा में अयोध्या को 492 साल लग जाएंगे। यह दर्द दिया था रामकोट मोहल्ले में एक टीले पर वर्ष 1528 से 1530 में बनी मस्जिद पर लगे शिलालेख ने, जिसपर लिखा था कि बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने इसे बनवाया था।
दशरथ महल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि जैसे राजकुमार राम वन जाकर मर्यादा पुरुषोत्तम बन गए, ठीक उसी तरह 29 जनवरी, 1885 को दायर पहले मुकदमे से लेकर करीब 135 साल की सुनवाई के बाद 9 नवंबर, 2019 को आए फैसले से न्याय व्यवस्था ने समूचे विश्व के लिए प्रतिमान गढ़ा है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, पुजारी राजू दास, रमेश दास जैसे तमाम संत कहते हैं कि इस युग में हनुमानजी की भूमिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे, जिनकी बल-बुद्धि-विद्या से अब श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का विशाल मंदिर आकार लेने जा रहा है।
कंचन कलस बिचित्र संवारे, सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे...
श्रीरामजन्मभूमि परिसर को सजा रहीं अवध विवि की छात्राओं का नेतृत्व करते हुए एसोसिएट प्रो. डॉ. सरिता द्विवेदी कहती हैं कि कंचन कलस बिचित्र संवारे। सबहिं धरे सजि निज निजद्वारे॥ बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।। कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं। संपूर्ण शहर का रंग-रोगन कर उसको दीपकों से सजाया गया था। सभी पुरुष, बच्चे और महिलाएं नए वस्त्रों में सजे-धजे थे। मिठाइयां बांटी जा रही थीं और उत्सव मनाया गया। ऐसा ही दृश्य मंदिर के भूमिपूजन को लेकर हर घर में है।
अयोध्या से रामेश्वरम तक का नया पर्यटन नक्शा बनेगा
जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. रामअवतार ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी अधिक स्थानों का पता लगाया है, जहां श्रीराम और सीता वनवास के दौरान रुके थे। सांसद लल्लू सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार के स्तर पर इन स्मारकों को कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। अयोध्या से रामेश्वरम तक पर्यटन का नया नक्शा तैयार किया जा रहा है।