फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम दरबार है जग सारा ...राम ही तीनों लोक के राजा

Wed, 05 Aug 2020 04:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा धीरेंद्र सिंह, अयोध्या
विज्ञापन
राम मंदिर का मॉडल उठाए एक राम भक्त... - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

राम दरबार है जग सारा,

विज्ञापन

राम ही तीनों लोक के राजा।
सबके प्रतिपाला सबके आधार,
राम दरबार है जग सारा।

रामराज्याभिषेक के उत्सवी माहौल का रामायण धारावाहिक में फिल्माया गया यह दृश्य बुधवार को हकीकत में अयोध्यावासी जीएंगे। त्रेतायुग में प्रभु राम ने उन्हें 14 साल इंतजार कराया था। अब वैसी ही खुशी कलियुग में 492 वर्ष बाद मिल रही है, जब 5 अगस्त से श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का विशाल मंदिर आकार लेने जा रहा है।

नारि कुमुदिनीं अवध सर, रघुपति बिरह दिनेस। अस्त भएं बिगसत भईं, निरखि राम राकेस॥
स्त्रियां कुमुदिनी हैं, अयोध्या सरोवर है और श्री रघुनाथजी का विरह सूर्य है (इस विरह सूर्य के ताप से वे मुरझा गई थीं)। अब उस विरह रूपी सूर्य के अस्त होने पर श्रीराम रूपी पूर्णचन्द्र को निरखकर वे खिल उठी हैं। 
विज्ञापन


यह बात महादेव ने त्रेतायुग में प्रभु राम के वनवास से लौटने पर अयोध्यावासियों के अभूतपूर्व उत्साह, उमंग और भक्ति को देखकर माता पार्वती से कही थी। तब शायद किसी ने कल्पना न की हो कि द्वापर के बाद कलियुग आएगा, तो सबके प्रतिपाला सबके आधार का दरबार सजने की प्रतीक्षा में अयोध्या को 492 साल लग जाएंगे। यह दर्द दिया था रामकोट मोहल्ले में एक टीले पर वर्ष 1528 से 1530 में बनी मस्जिद पर लगे शिलालेख ने, जिसपर लिखा था कि बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बाकी ने इसे बनवाया था।

दशरथ महल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य कहते हैं कि जैसे राजकुमार राम वन जाकर मर्यादा पुरुषोत्तम बन गए, ठीक उसी तरह 29 जनवरी, 1885 को दायर पहले मुकदमे से लेकर करीब 135 साल की सुनवाई के बाद 9 नवंबर, 2019 को आए फैसले से न्याय व्यवस्था ने समूचे विश्व के लिए प्रतिमान गढ़ा है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, पुजारी राजू दास, रमेश दास जैसे तमाम संत कहते हैं कि इस युग में हनुमानजी की भूमिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे, जिनकी बल-बुद्धि-विद्या से अब श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का विशाल मंदिर आकार लेने जा रहा है।

कंचन कलस बिचित्र संवारे, सबहिं धरे सजि निज निज द्वारे...
श्रीरामजन्मभूमि परिसर को सजा रहीं अवध विवि की छात्राओं का नेतृत्व करते हुए एसोसिएट प्रो. डॉ. सरिता द्विवेदी कहती हैं कि कंचन कलस बिचित्र संवारे। सबहिं धरे सजि निज निजद्वारे॥ बंदनवार पताका केतू। सबन्हि बनाए मंगल हेतू।। कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम अपना चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं। संपूर्ण शहर का रंग-रोगन कर उसको दीपकों से सजाया गया था। सभी पुरुष, बच्चे और महिलाएं नए वस्त्रों में सजे-धजे थे। मिठाइयां बांटी जा रही थीं और उत्सव मनाया गया। ऐसा ही दृश्य मंदिर के भूमिपूजन को लेकर हर घर में है।



अयोध्या से रामेश्वरम तक का नया पर्यटन नक्शा बनेगा
जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. रामअवतार ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी अधिक स्थानों का पता लगाया है, जहां श्रीराम और सीता वनवास के दौरान रुके थे। सांसद लल्लू सिंह कहते हैं कि केंद्र सरकार के स्तर पर इन स्मारकों को कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। अयोध्या से रामेश्वरम तक पर्यटन का नया नक्शा तैयार किया जा रहा है।
 

विज्ञापन

प्रभु राम की वंशावली...

1. मनु 2. इक्ष्वाकु 3. शशाद 4. ककुत्स्थ 5. अनेनस 6. पृथु 7. विश्वगाश्व आर्द्र 8. युवनाश्च 9. श्रावत्स 10. वृहदश्व 11. कुवलयाश्व 12. दृढ़ाश्व 13. प्रमोद 14. हर्यश्रव 15. निकुम्भ 16. संहताश्व 17. कृशाश्व 18. प्रसेनजित 19. युवनाश्च 20. मान्धातु 21. पुरुकुत्स 22. त्रसदस्यु 23. सम्भूत 24. अनरण्य 25. पृषदश्व 26. हर्यश्रव 27. वसुमनस 28. तृधन्वन 29. त्रैयारुण 30. त्रिशंकु 31. हरिश्चन्द्र 32. रोहित 33. हरित 34.चंचु 35. विजय 36. रुरुक 37. वृक 38.  बाहु 39. सगर 40. असमज्जस 41. अंशुमन 42. दिलीप 43. भगीरथ 44. श्रुत 45. श्रुत 46.  नाभाग 47. अम्बरीष 48. सिंधुदीप 49. अयतायुस 50. ऋतुपर्ण 51. सर्वकाम 52. सुदास 53. कल्माषपाद 54. अश्मक 55. मूलक 56. शतरथ 57. वृद्धशर्मन 58. विश्वसह 59. दिलीप 2 60. दीर्घबाहु 61. रघु 62. अज 63. दशरथ 64. रामचन्द्र

राम वनवास से जुड़े 17 स्थानों पर बनेगा कॉरिडोर
  • तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर राम ने नाव से नदी पार की।
  • शृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किमी दूर यह स्थल निषादराज का गृह राज्य था। यहीं पर उन्होंने केवट से गंगा पार कराने को कहा था। शृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।
  • कुरई : सिंगरौर में गंगा पार कर भगवान श्रीराम कुरई में रुके।
  • प्रयागराज : कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयागराज पहुंचे थे।
  • चित्रकूट : इसके बाद राम चित्रकूट पहुंचे, जहां राम को अयोध्या ले जाने के लिए भरत आए थे।
  • सतना : यहां अत्रि ऋषि का आश्रम था।
  • दंडकारण्य : चित्रकूट से निकलकर भगवान श्रीराम दंडकारण्य पहुंचे। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकारण्य था।
  • पंचवटी नासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षेत्र में है, जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी।
  • सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।
  • पर्णशाला : पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्मम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को पनसाला भी कहते हैं।
  • तुंगभद्रा : तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर भगवान श्रीराम, सीताजी की खोज में गए थे।
  • शबरी का आश्रम : रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो केरल में स्थित है।
  • ऋष्यमूक पर्वत : मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए राम ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की व बाली का वध किया।
  • कोडीकरई : यहां राम की सेना ने पड़ाव डाला और रामेश्वरम की ओर कूच किया।
  • रामेश्वरम : श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
  • धनुषकोडी : श्रीराम रामेश्वरम के आगे धनुषकोडी पहुंचे। यहीं से उन्होंने रामसेतु बनाया।
  • नुवारा एलिया पर्वत : श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें