अयोध्या। नगर निगम बोर्ड की बैठक में बृहस्पतिवार को एक घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद मौजूदा वित्त वर्ष में 20 करोड़ लाभ का बजट पास हुआ। इसमें 2.76 अरब रुपये से रामनगरी के विकास कार्य कराए जाएंगे।
इसके पहले बैठक शुरू होते ही सपा-भाजपा के पार्षद एकजुट होकर 10 लाख रुपये तक के टेंडर मैन्युवल कराने पर अड़ गए। जैसे ही नगर आयुक्त ने कोई भी काम मैन्युवल न कराने की बात कही, हंगामा तेज हो गया।
सपा पार्षदों ने सदन में ही जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया, बाद में वे नारेबाजी करते हुए सदन छोड़कर चले गए। महापौर ऋषिकेेेश उपाध्याय की अध्यक्षता में नगर निगम के बजट की बैठक बृहस्पतिवार को बुलाई गई थी।
सुबह 11 बजते ही बोर्ड की बैठक शुरू हुई। बैठक में सबसे पहले निर्माण विभाग के दो नए अधिकारियों का परिचय कराया गया। इससे पहले की कि बजट पर चर्चा होती, सपा पार्षद की ओर से पूर्व में बोर्ड में पास हुए कार्यों पर कोई काम न होने का आरोप लगाते हुए जवाब मांगा गया।
इसके बाद सपा पार्षद रामभवन यादव की ओर से पूर्व की बैठक में पास 10 लाख रुपये तक के कार्य मैन्युवल कराने जाने का मामला उठाया गया। नगर आयुक्त विशाल सिंह ने कोई भी टेंडर मैनुअल न कराए जाने की बात कही, तो सपा-भाजपा के पार्षद बिफर उठे।
एक के बाद एक बोर्ड में पास हुए कार्यों व उसके सापेक्ष काम न होने का मुद्दा गरमाता गया। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लग गई। सपा पार्षद रामभवन व हाजी असद अपनी सीट से उठ गए।
इसी के साथ सभी सपा पार्षद समेत अन्य दलों के पार्षद जमीन पर बैठ गए और नगर आयुक्त के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। लगभग एक घंटे तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
इसी बीच मामले को शांत करने के लिए 10 लाख तक के कार्यों का मैन्युवल टेंडर किये जाने पर चर्चा शुरू हुई। लखनऊ से स्थानांतरित होकर आए चीफ इंजीनियर मनीष अवस्थी ने लखनऊ में 10 लाख के कार्यों का टेंडर किए जाने की बात कही।
अंत में निर्णय लिया गया है कि शासनादेश को मंगा कर 10 लाख तक कार्यों का टेंडर मैन्युवल किया जाएगा। इस पर भी बिफरे पार्षदों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। सदन ने नगर आयुक्त को अपने शब्द वापस लेने का दबाव बनाया।
इस पर नगर आयुक्त ने सदन के सामने अपने शब्द वापस लेने की बात कही, लेकिन सपा पार्षद सदन से वॉकआउट कर गए। वॉकआउट करने वालों में रामभवन यादव, हाजी असद अहमद, मो. फरीद, महेंद्र शुुक्ला, विशाल पाल, मो. सादिक, उमेश यादव समेत 10 सदस्य रहे।
दो बार पार्षदों का दल उनको वापस लेने बाहर गया लेकिन कोई वापस नहीं आया। इस पर नगर आयुक्त नाराज पार्षदों को मनाने खुद बाहर गए। वहां काफी देर तक मंत्रणा चली, लेकिन सपा पार्षद वापस न आकर नगर आयुक्त के विरोध में नारेबाजी करने लगे।
लगभग एक घंटे तक ड्रामे के बाद सदन की कार्यवाही भाजपा व अन्य दलों के सदस्यों के साथ शुुरू हुई। सदन में कार्यकारिणी की ओर से पास मौजूदा वित्त वर्ष का बजट प्रस्ताव रखा गया। इसे लेखाधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह ने पढ़कर सुनाया।
मौजूदा वित्त वर्ष में विभिन्न स्रोतों से आय 2.96 अरब रुपये अनुमानित की गई है। इस प्रकार यह बजट लगभग 20 करोड़ रुपये के लाभ का पेश हुआ। बजट में विकास पर फोकस किया गया है।
इस दौरान मुख्य रूप से पार्षद अशोक द्विवेदी, अलोक मिश्र, अनुभव गुप्ता, सलमान हैदर, अर्चना श्रीवास्तव, मिक्की सिंह समेत अन्य सभी पार्षद मौजूद रहे।
बजट में विकास कार्यों के लिए तय धनराशि
* स्मार्ट सिटी के लिए 75 करोड़
* निर्माण विभाग के लिए 38 करोड़
* जलकल के लिए 12.50 करोड़
* प्रकाश विभाग के लिए 7.85 करोड़
* स्वच्छ भारत मिशन के लिए 12 करोड
* स्वास्थ्य के लिए 12 करोड़
* अमृत योजना के लिए एक करोड़
* नगरीय व्यवस्था के लिए 25 लाख
* दीनदयाल योजना के लिए 9.50 करोड़
* कार्यालय खर्च के लिए 10 लाख
* नजारत व अन्य कार्यों के 3.45 करोड़
* नगर निगम कार्यालय के लिए 10 करोड़
(इसके अलावा सभी अन्य मदों में धनराशि व्यय करने की रूपरेखा तैयार की गई है।)
अयोध्या को स्वच्छ व सुंदर नगरी बनाने के लिए नगर निगम के लोग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दो वर्षों में कोरोना के कारण विकास कार्य में कुछ कमी अवश्य रह गई है, लेकिन मौजूदा समय में तेजी से विकास कार्यों को कराया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही अयोध्या विश्व की सर्वश्रेष्ठ नगरी के रूप विकसित होगी।- ऋषिकेश उपाध्याय, महापौर अयोध्या नगर निगम
अयोध्या को विकसित कर विश्व के पटल पर स्थापित किया जाएगा। इससे के लिए कार्य चल रहा है। सदन में जो कुछ हुआ वो गलतफहमी के कारण हुआ है। अगर बोर्ड ने पहले पास कर दिया है कि 10 लाख के कार्य मैन्युवल होगा तो नगर आयुक्त को बदलने का अधिकार नहीं है। चीफ इंजीनियर ने बताया है कि कोई शासनादेश है कि 10 लाख तक के कार्य मैन्युवल हो सकते हैं, अगर शासनादेश है तो आगे से 10 लाख तक कार्य मैन्युवल होंगे।- विशाल सिंह, नगर आयुक्त