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सेना को किसी भी चुनौती के लिए हमेशा तैयार रहना होगा

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अयोध्या। एक आधुनिक व पेशेवर भारतीय सेना को अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। डोगरा रेजीमेंट बड़ी संख्या में वीरता पुरस्कारों को हासिल करने के साथ इन्फैंट्री की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी रेजीमेंटों में से एक है। रेजिमेंट का स्वतंत्रता से पहले और बाद के युद्ध में शानदार रिकार्ड है। ये बातें थल सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित परेड शो को संबोधित करते हुए कहीं।
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उन्होंने कहा कि डोगरा रेजिमेंट को स्वतंत्रता के बाद 11 युद्ध सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इनमें एक अशोक चक्र, नौ महावीर चक्र, 11 कीर्ति चक्र, 58 शौर्य चक्र व 39 वीर चक्र शामिल हैं। इससे पहले सेनाध्यक्ष ने डोंगरा रेजीमेंट की 20वीं और 21वीं बटालियन को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया। सेनाध्यक्ष ने आयोजित परेड की समीक्षा की और युद्ध संचालन, खेल और प्रशिक्षण को शामिल करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में डोगरा रेजिमेंट के प्रशंसनीय प्रयासों और समृद्ध परंपराओं की सराहना की।
उन्होंने नवगठित इकाइयों को उनकी सेवा के शुरुआती चरणों में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। परेड शो में थल सेनाध्यक्ष के साथ-साथ पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एनसी विज, जनरल ऑफीसर इन कमांडिंग इन्चार्ज लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी, जनरल ऑफीसर इन कमांडिंग इन्चार्ज और कर्नल ऑफ डोगरा रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन सहित बड़ी संख्या में सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी मौजूद रहे। इस समारोह के परेड कमांडर ब्रिगेडियर जेकेएस वर्क थे जो डोगरा रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट हैं।
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