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रामजन्मभूमि कार्यशाला में लौटने लगी रौनक

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अयोध्या। राम जन्मभूमि कार्यशाला में एक बार फिर से रौनक लौटने लगी है। पिछले वर्ष कोरोना काल से ही कार्यशाला भक्तों से सूनी चल रही थी। अब जैसे ही कार्यशाला में राममंदिर के पत्थरों की नक्काशी का काम प्रारंभ हुआ तो एक बार फिर से भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है।
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कार्यशाला में ठक-ठक की आवाज के साथ-साथ अब जय श्रीराम के जयघोष भी गुंजायमान हो रहे हैं। कारीगरों द्वारा पत्थरों पर की जा रही नक्काशी देखने को लेकर भक्तों में खासा उत्साह भी है। भक्त राम मंदिर के पत्थरों के प्रति अपनी श्रद्धा भी प्रकट करते दिखते हैं।
रामघाट स्थित कार्यशाला 1989 से शुरू हुई थी। इस कार्यशाला में राममंदिर के गर्भगृह के पत्थरों को तराश कर रखा गया है। साथ ही साथ राममंदिर आंदोलन के दौरान करीब 55 देशों से एकत्र की गई रामशिलाएं भी जमा की गई हैं।
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यही नहीं राममंदिर के मॉडल के साथ-साथ मंदिर आंदोलन के नायकों की जानकारी भी यहां एक प्रदर्शनी के माध्यम से दी गई है। अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यहां एक कार्यालय भी बना लिया है। ऐसे में यह कार्यशाला हमेशा से राम भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र रही है।
पिछले वर्ष जब कोरोना की पहली लहर आई तो रामनगरी में भक्तों का प्रवेश निषेध कर दिया गया था। इसके एक साल बाद 02 सितंबर से कार्यशाला में राममंदिर के पत्थरों की तराशी व नक्काशी का काम शुरू हुआ तो कार्यशाला में भी हलचल बढ़ गयी है।
अयोध्या पहुंचने वाला भक्तों का समूह आठ साल बाद शुरू हुई कार्यशाला की ओर भी श्रद्धा भाव से रुख कर रहा है। राजस्थान के कारीगर राममंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की नक्काशी में जुटे हैं तो उनकी कलात्मक शैली को देखने के लिए भक्तों में भी उत्कंठा दिखती है।
किस तरह ये कारीगर पत्थरों में रामकथा की थीम सहित देवी-देवताओं के चित्र उकेरते हैं उसको लेकर भक्त निहाल नजर आते हैं। कार्यशाला मंगलवार को पहुंचे भक्त राममंदिर के पत्थरों पर माथा टेककर श्रद्धावनत होते दिखे।
लखनऊ के भक्त आशीष मौर्या ने कहा कि राममंदिर निर्माण कार्य देखकर खुशी हो रही है। करीब 80 वर्षीय वाराणसी निवासी आशाराम पांडेय पत्थरों पर माथा टेकते दिखे, बोले कि यह सौभाग्य है कि हमारी आंखें राममंदिर निर्माण की साक्षी बन रही हैं।
इसी तरह मध्यप्रदेश, झारखंड के भक्तों का समूह भी कार्यशाला में मंदिर मॉडल को निहारता दिखा। वहीं राममंदिर के प्रथम तल के लिए तराशे गए पत्थरों पर एक बार फिर से काई जमने लगी है।
अभी पिछले वर्ष ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जून-जुलाई में दिल्ली की एजेंसी के जरिए करीब 50 हजार घनफुट पत्थरों को चमकाने का काम कराया गया था।
ये पत्थर करीब तीन दशक से खुले आसमान के नीचे पड़े होने के कारण बदरंग हो गए थे, उन पर काई जम गई थी। साफ-सफाई के बाद इन पत्थरों की भव्यता देखते ही बन रही थी।
इनमें गर्भगृह में लगने वाले करीब 30 पिलर को श्रीराम जन्मभूमि में पहुंचा दिया था, शेष तराशे गए पत्थर यहीं कार्यशाला में रख दिए गए। करीब एक साल से खुले आसमान में होने के कारण एक बार फिर से इन चमकाए गए पत्थरों पर काई जमने लगी है।
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ट्रस्ट सूत्रों ने बताया कि शीघ्र ही इन पत्थरों की सफाई का काम शुरू होगा और इन पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर पहुंचाया जाएगा।
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