अयोध्या। रामनगरी को आध्यात्मिक व विश्वस्तरीय पर्यटन सिटी बनाने में निजी फर्मों की सहभागिता भी होगी। इसके तहत रामनगरी को चमाचम बनाने के लिए पीपीपी (पब्लिक प्राईवेट पार्टनशिप) मोड का सहारा लिया जाएगा। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है ताकि शहर के वाह्य आवरण को सुंदर व आकर्षक तरीके से विकसित कराया जा सके। इसे अमल में लाने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण जल्दी राष्ट्रीय स्तर की एक इंवेर्स्ट्स समिट आयोजित करेगा। प्राधिकरण ने इंवेस्ट के प्रकार का मॉडल बनाने का कार्य कर रहा है।
प्राधिकरण प्रशासन का मानना है कि रामनगरी में इंट्री करने वाले छह प्रमुख द्वारों से कार्य शुुरू कर प्रमुख योजनाओं में निजी इंवेर्स्ट्स की सहभागिता बेहतर विकल्प होगा। केंद्र व प्रदेश सरकार अयोध्या को एक माडल शहर के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए करीब 25 हजार करोड़ की योजनाएं प्रस्तावित है। इसमें से अधिकांश योजनाओं को सहमति मिल चुकी है लेकिन कोरोना काल के चलते किसी भी योजना पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। विकल्प के तौर पर अयोध्या के वाह्य आवरण को सजाने के लिए पीपीपी मोड का सहारा लिए जाने का निर्णय लिया गया है।
इस संबंध में 11 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस बात के निर्देश दिए गए कि अयोध्या में इंवेर्स्ट्स की तादात को बढ़ाया जाए। कोशिश यह की जाए कि वाह्य आवरण के अधिकांश कार्य पीपीपी मोड पर हो जाएं। मुख्य सचिव के निदेश के बाद कार्य को अमली जामा पहनाने में अयोध्या विकास प्राधिकरण के अधिकारी जुट गए हैं। इंवेर्स्ट्स मीट के लिए मॉडल तैयार कर इसमें अयोध्या मेें सभी छह प्रमुख द्वारों से लेकर अंदर की संरचना को विकसित करने के लिए रूपरेखा तय की जा रही है।
इसमें कुछ स्थान सीधे इंवेर्स्ट्स को देने तो कुछ स्थान पर भूमि खरीद कर देने का प्लान है। इसका पूरा मॉडल तैयार करने के लिए ग्लोबल कंसलटेंट टीम एलईए एसोसिएट्स, सीपी कुकरेजा व एलएंड टी को जिम्मेदारी दी गई है। इंवेस्ट का मॉडल तैयार होने के बाद शासन की मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद अयोध्या विकास प्राधिकरण इंवेर्स्ट्स समिट बुलाएगा। इसमें राष्ट्रीय स्तर के इंवेर्स्ट्स से लेकर अयोध्या के प्रमुख व्यवसायियों से विकास प्राधिकरण के अधिकारी बातचीत कर पीपीपी मोड के तहत कार्य कराने को सहमति बनाएंगे।
तीन विशेष स्थानों पर होगा फोकस
अयोध्या के वाह्य आवरण को सजाने के लिए तीन विशेष स्थानों पर फोकस होगा। पहला स्थान सभी छह मार्गों पर प्रस्तावित प्रवेश द्वार व यात्री निवास होंगे। इसके उपरांत अयोध्या में सरयू नदी के पार व रामनगरी में बंधें के किनारे प्रस्तावित योजनाएं को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा नए विकास के लिए प्रयागराज, लखनऊ-गोरखपुर, आजमगढ़- अयोध्या हाईवे के किनारे के भूमि का आवंटन व क्रय कर इंवेर्स्ट्स को देने की योजना है। इसमें भूमि किस प्रकार दी जाएगी इसपर मंथन किया जा रहा है।
आवसीय कॉलोनी के लिए प्रमुख बिल्डर्स होंगे आमंत्रित
अयोध्या में पिछले कई वर्षों से आवासीय कॉलोनी नहीं विकसित हो पा रही है जबकि आबादी का ग्राफ व लोगों की आवश्यकताएं लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर अयोध्या विकास प्राधिकरण व आवास विकास के पास इतना बजट नहीं है कि वह नयी आवासीय कॉलोनी विकसित करा सके। अब पीपीपी मोड के तहत देश के प्रतिष्ठित बिल्डरों की मदद से नई आवासीय कॉलोनी को विकसित किए जाने की योजना है।
अयोध्या के वाह्य आवरण सहित भीतरी संरचना को सजाने के लिए पीपीपी मोड का प्रयोग किया जाएगा। इसके निर्देश मुख्य सचिव की ओर से जारी कर दिए गए है। अयोध्या विकास प्राधिकरण ने इस पर कार्य शुरू कर दिया है। जल्दी ही एक बड़ी इंवेर्स्ट्स समिट होगी। इसमें राष्ट्रीय स्तर के इंवेर्स्ट्स से लेकर अयोध्या के स्थानीय लोगों को शामिल किया जाएगा। उम्मीद ही इसके अच्छे परिणाम आएंगे। आरपी सिंह, सचिव अयोध्या विकास प्राधिकरण