अयोध्या। जिला अस्पताल में न्यूरोलॉजी से संबंधित इलाज की सुविधा नहीं शुरू हो सकी है। प्रतिदिन ओपीडी से लेकर आईपीडी तक तमाम मरीज यहां पहुंचते हैं, जिन्हें रेफर कर दिया जाता है। कुछ तो लखनऊ तक जाने की जहमत उठा लेते हैं, लेकिन कुछ गरीब और लाचार मरीज डॉक्टर के रेफर करने के बावजूद हाथ-पैर जोड़कर यहीं पड़े रहते हैं और समुचित इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं।
लगभग हर समय जिला अस्पताल में मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। निकटवर्ती जिलों से भी लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अन्य विभागों के साथ ही न्यूरोलॉजी से संबंधित इलाज भी यहां नहीं है। सुपर स्पेशलिटी स्वीकृत पांच पदों के सापेक्ष एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है। प्रतिदिन यहां मिर्गी, पैरालिसिस, माइग्रेन, हेड इंजरी आदि से बीमारियों के कई मरीज यहां पहुंचते हैं। हेड इंजरी के मामले तो इमरजेंसी से तत्काल रेफर कर दिए जाते हैं, लेकिन अन्य बीमारियों के कुछ मरीजों को प्राथमिक उपचार के लिए भर्ती किया जाता है, जिन्हें बाद में रेफर कर दिया जाता है। सक्षम लोग लखनऊ तक दौड़-भाग करने का जोखिम उठा लेते हैं, लेकिन गरीब ईश्वर का नाम लेकर यहीं पड़े रहते हैं। यह स्थिति वर्षों से है, फिर भी इसके निदान के लिए कोई पहल नहीं की गई।
निजी अस्पतालों में चुकानी पड़ती है मोटी रकम
जिले के निजी अस्पतालों में लखनऊ व अन्य जगहों से विशेष दिवस में न्यूरो फिजीशियन व सर्जन आकर ओपीडी करते हैं, जहां मरीजों को ले जाने के लिए सरकारी अस्पतालों में दलालों की टीम लगी होती है। मरीज निजी अस्पतालों में पहुंचते हैं तो वहां उन्हें मोटी रकम चुकता करना पड़ता है।
हेड इंजरी के मामले रेफर करना मजबूरी
जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. आशीष पाठक ने बताया कि इमरजेंसी में प्रतिदिन तीन-चार मामले हेड इंजरी के आते हैं, न्यूरो सर्जन के अभाव में उन्हें रेफर करना पड़ता है। माइग्रेन व अन्य छोटी समस्याओं को तो प्राथमिक उपचार के लिए भर्ती किया जाता है, कुछ लोग ठीक भी हो जाते हैं।
लोगों ने सुनाई समस्याएं..
काफी दिन तक रीढ़ व कमर में दर्द से पीड़ित थे। डॉक्टर को दिखाया तो न्यूरो की समस्या पता चली। जिला अस्पताल में कोई डॉक्टर न होने से एक निजी अस्पताल गए, जहां काफी रुपये खर्च करके इलाज कराया। अब कुछ आराम है।
-शिवम तिवारी
-भतीजे को न्यूरो सर्जन से संबंधित समस्या हुई तो जिले में खूब चक्कर काटा। काफी मेहनत के बाद एसजीपीजीआई पहुंचे, जहां से इलाज चल रहा है। जिले में ही सुविधा तो ज्यादा भटकना न पड़ता।
-अमरीश पाठक
वर्जन...
अस्पताल में अति विशिष्टता के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं है। न्यूरोलॉजी से संबंधित मामलों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी होती है। सूचनाएं शासन को भेजी जाती हैं।
-डॉ सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल, अयोध्या