अयोध्या। रामनगरी अयोध्या शिव-उपासना का भी मुख्य केंद्र मानी जाती है। यहां भगवान शिव के कई ऐसे पौराणिक मंदिर हैं जिनको लेकर भक्तों में अगाध आस्था है। रामनगरी में भोले की मुख्य पीठ के रूप में नागेश्वरनाथ प्रतिष्ठित हैं। इनकी स्थापना प्रभु श्रीराम के पुत्र महाराज कुश ने की थी।
यह रामनगरी में शिवभक्ति का प्रधान केंद्र है। नागेश्वरनाथ को अयोध्या नगर का भौगोलिक केंद्र भी माना जाता है। कुछ वर्षों पहले बीएचयू के वैज्ञानिकों के शोध में इसकी पुष्टि हुई थी। वैज्ञानिकों ने नागेश्वरनाथ के इर्द-गिर्द चुंबकीय (अलौकिक) शक्तियों की भी मौजूदगी की पुष्टि की थी।
मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने की थी। नागेश्वरनाथ मंदिर में आज भी लवकुश की प्रतिमा स्थापित है। सावन शुक्ल पूर्णिमा को इनकी भी जयंती यहां मनाई जाती है। इस मंदिर का पहली बार जीर्णोद्धार महाराजा विक्रमादित्य ने कराया था। वहीं दूसरी बार मंदिर का पुनरुद्धार नवाब सफदर जंग के मंत्री नवल राय ने 1750 में कराया था।
बीएचयू के भू-वैज्ञानिक पीबी सिंह राना के निर्देशन में कल्चरल लैंड स्केपिंग एंड हेरिटेज ऑफ अयोध्या विषय पर उनकी टीम ने एक शोध किया था। शोध में शामिल प्रो. सर्वेश कुमार ने दावा किया था कि उनकी शोध में अयोध्या का भौगोलिक केंद्र यानि की नाभि नागेश्वरनाथ मंदिर ही पाया गया है। यही नहीं शोध में मंदिर के इर्द-गिर्द चुंबकीय (अलौकिक) शक्तियों के भी प्रमाण मिले।
प्रो. कुुमार ने तब दावा किया था कि इस स्थान पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड की खोज उन्होंने की थी। इसी के चलते यहां विशेष शोध की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रो. पीबी राना की ओर से एक प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा भी जा चुका है। हालांकि करीब दो वर्षों से शोध का काम अभी आगे नहीं बढ़ सका है।
नागेश्वरनाथ की महत्ता के बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार कनिंघम ने भी उल्लेख किया है। कनिंघम के अनुसार रामेश्वरम, सोमनाथ व काशी विश्वनाथ के समान ही अयोध्या स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर का भी शिव आराधना में विशिष्ट स्थान है।
नागेश्वरनाथ मंदिर के आस-पास मौजूद अलौकिक शक्तियों के प्रभाव से ही मानसिक रोगी ठीक हो जाते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक सभापति तिवारी बताते हैं कि इसी मान्यता के चलते दूर-दूर के लोग अपने बीमार परिवारीजनों को यहां लाकर छोड़ जाते हैं।
कहा जाता है कि नागेश्वरनाथ के आस-पास स्थित ऐसा स्थल जहां अलौकिक शक्तियां विराजमान है, वहां मानसिक रोगी जब पहुंचता है तो वह ठीक हो जाता है। इस स्थान विशेष की खोज के लिए कई प्रयास हुए हैं लेकिन अब तक यह खोजा नहीं जा सका है। फिर भी हजारों की संख्या में मानसिक रोगी यहां से ठीक होकर वापस लौट चुके हैं।