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Ayodhya News: रामलला की मूर्ति के लिए अभी आएंगे और पत्थर

Sun, 05 Feb 2023 11:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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रामसेवकपुरम की कार्यशाला में नेपाल से आई शिला का दर्शन करने के लिए लोगो की भीड़ उमड़ रही है।-संवा
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अयोध्या। नेपाल से आई शिला से रामलला के विग्रह का निर्माण अभी तय नहीं है। इसके लिए कई जगहों से अभी और शिलाएं मंगाई जा रही हैं। जब सभी शिलाएं आ जाएंगी तब उनका तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। रामलला की अचल मूर्ति की थीम श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा मूर्ति विशेषज्ञों की टीम को सौंप दी गई है। रामायण में वर्णित रामलला के बाल स्वरूप की तरह ही रामलला का विग्रह बनेगा। रामलला की मूर्ति के लिए अभी उड़ीसा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश से भी शिलाएं मंगाई जा रही हैं। इन शिलाओं का तुलनात्मक अध्ययन मूर्ति विशेषज्ञ करेंगे। विशेषज्ञ देखेंगे कि जो थीम ट्रस्ट द्वारा सौंपी गई है उस थीम पर पत्थर पर मूर्ति गढ़ी जा सकेगी कि नहीं। पत्थर की आयु समेत कई बिंदुओं पर मंथन करने के बाद अंतिम निर्णय चित्रकार वासुदेव कामथ लेंगे। वे अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपेंगे। ट्रस्टियों की सहमति के बाद वासुदेव कामथ द्वारा मूर्ति तैयार कराई जाएगी।
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रामायण में रामलला के जिस स्वरूप की कल्पना की गई है, कुछ उसी तरह की थीम मूर्तिकारों को सौंपी गई है। थीम वाल्मीकि रामायण, रामचरित मानस, अध्यात्म रामायण आदि के गहन अध्ययन के बाद तैयार की गई है। रामायण के जरिए राम का जो स्वरूप लोगों के जेहन में बसा है, वही स्वरूप मूर्ति में देखने को मिलेगा।
रामकथा के मर्मज्ञ आचार्य राधेश्याम शास्त्री ने बताया कि काकभुशुण्डि द्वारा श्रीराम की बाललीला बताई गई है। जिसमें उनके स्वरूप का विस्तृत वर्णन है। काकभुशुण्डि कहते हैं कि मरकत मृदुल कलेवर स्यामा। अंग अंग प्रति छबि बहु कामा। नव राजीव अरून मृदु चरना...अर्थात श्रीराम श्याम और कोमल शरीर के हैं। अंग-अंग में बहुत से कामदेवों की शोभा छाई हुई है। नवीन लाल कमल के समान लाल-लाल कोमल चरण हैं। सुंदर अंगुलियां हैं और नख अपनी ज्योति से चंद्रमा की कांति को हरने वाले हैं।
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इसी तरह वे कहते हैं कि अरून पानि नख करज मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर। कंध बाल केहरि दर ग्रीवा। चारू चिबुक आनन छबि सींवा..यानि कि श्रीराम की लाल-लाल हथेलियां, विशाल भुजाओं पर सुंदर आभूषण हैं। सिंह के बच्चे के समान कंधे और शंख के समान गला है। फिर कहते हैं कि नील कंज लोचन भव मोचन..श्रीराम के नेत्र नीले कमल के समान हैं।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि रामलला के विग्रह के मुख में कोमलता, देवत्व, पांच वर्ष के बालक की मुद्रा व मधुर मुस्कान, पैरो में खड़ाऊं, कंधे पर धनुष व हाथ में बाण..इस तरह की मूर्ति की कल्पना की गई है। थीम रामायण में वर्णित बालस्वरूप पर आधारित है।

तैयार हो रहा ट्रस्ट का वार्षिक कैलेंडर
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वार्षिक कैंलेंडर तैयार कर रहा है। इस कैलेंडर में वर्ष में पड़ने वाले विशेष पर्व, त्योहारों का जिक्र होगा। स्थायी राममंदिर में वर्ष भर आयोजन हो सकें इसलिए पर्व व त्योहारों की सूची बनाई जा रही है। कौन-कौन से त्योहार मंदिर में मनाए जाएंगे इस कैलेंडर के जरिए श्रद्धालु भक्त भी जान सकेंगे। ट्रस्ट का यह कैलेंडर वास्तविक नवरात्र के प्रथम दिवस 22 मार्च को जारी होगा। संवाद
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