अयोध्या। जिले में इस्लाम धर्म के प्रवर्तक मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश जश्ने ईद मिलादुन्नबी को मनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ बैठक कर कोविड प्रोटोकाल के तहत शहर में निकलने वाले जुलूस को अनुमति प्रदान कर दी है। जुलूस में अंजुमने की दूसरे अंजुमनों से दूरी 20 फुट की होगी। एक अंजुमन में 10 से अधिक लोग शरीक नहीं हो सकेंगे। अंजुमन की ओर डीजे नहीं लगया जाएगा, सिर्फ छोटे स्पीकरों के जरिए अंजुमने अपना कलाम पेश कर सकेंगी।
जिले में जश्ने ईद मिलादुन्नबी बीते वर्षों में धूमधाम से मनाया जाता रहा है लेकिन पिछले दो वर्षों से कोविड के चलते यह पर्व केवल सांकेतिक रूप से मनाया जा रहा है। कोविड संक्रमण का प्रभाव कुछ कम होने पर कोविड प्रोटोकाल के तहत पर्व को मनाने की अनुमति जिला प्रशासन ने प्रदान की है। इसकी तैयारियां शहर में शुरू हो चुकी है। घर-घर मिलाद शरीफ व मस्जिदों में नातों को सुनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। घरों में लंगर बनाकर गरीबों व अकीदतमंदों में बांटे जा रहे हैं। घरों को लाइटों से सजाने समेत झंडों को लगाया जा रहा है। इसके साथ शहर की मरकजी जामा मस्जिद टाटशाह की ओर से मुस्लिम समुदाय के लिए गाइडलाइन जारी कर दी गई है।
गाइड लाइन में बताया गया है कि 19 अक्तूबर को कोविड प्रोटोकाल के तहत सुबह आठ बजे जामा मस्जिद टाटशाह से निकलेगा। जुलूस अपने परंपरागत मार्ग चौक, रिकाबगंज, कसाबबाड़ा, फतेहगंज, बजाजा होता हुआ टाटाशाह मस्जिद पर दोपहर एक बजे तक समाप्त हो जाएगा। सुबह साढ़े सात बजे अंजुमनों को अपनी उपस्थिति मस्जिद में दर्ज करानी होगी। इस बार टोकन प्रणाली नहीं होगी। अंजुमने 10-10 के समूह में जा सकेगी। शहर काजी ने मौलाना शमशुल कमर अलीमी ने बताया है कोविड प्रोटोकाल का पालन न करने वालों की अंजुमनों को जुलूस में शिरकत नहीं करने दिया जाएगा।