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भूंकप के झटकों को रोकने के लिए लगाई जाएंगी तांबे की पत्तियां

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अयोध्या। रामजन्मभूमि पर राममंदिर की नींव के निर्माण का दूसरा चरण संचालित है। इसके तहत डेढ़ मीटर ऊंची रॉफ्ट ढाली जा रही है। राममंदिर न सिर्फ भव्यता की मिसाल होगा बल्कि मजबूती व तकनीक के मामले में भी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में शामिल होगा।
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राममंदिर को भूकंप के झटकों से सुरक्षित रखा जा सके इसके लिए ताम्र की पत्तियां लगाई जाएंगी। राममंदिर की दीवारों पर कुल 34 टन तांबे का प्रयोग किया जाना है। मंदिर में झारखंड की खदानों से उत्पादित तांबे का उपयोग होगा।
राम मंदिर निर्माण की तकनीकी देखरेख करने वाली एलएंडटी की टीम शुक्रवार को झारखंड के गई थी। वहां से तांबे का सैंपल लेकर आई है। दरअसल, राम मंदिर की दीवारों में करीब 34 टन तांबा लगाने की योजना है।
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34 टन तांबा की कीमत आज की एलएमइ प्राइस के मुताबिक दो करोड़ 30 लाख रुपये होती है। लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमइ) के तहत एक टन तांबा की कीमत अभी 9 हजार डॉलर है।
भारतीय रुपयों में इसका आकलन किया जाये तो एक टन तांबा की कीमत छह लाख 75 हजार रुपये होती है। एलएंडटी के पदाधिकारी और अन्य पदाधिकारी सैंपल देखकर यह तय करेंगे कि तांबे को मंदिर निर्माण में उपयोग में लाया जाए या नहीं।
इसकी जांच आईआईटी चेन्नई की प्रयोगशाला में किया जाएगा। राममंदिर निर्माण के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा के मुताबिक राममंदिर निर्माण बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से किया जाना है।
पत्थरों को जोड़ने के लिए ताम्र की पत्तियों का प्रयोग किया जाएगा। ये पत्तियां भूकंप के दौरान पत्थरों को हिलने से रोकने में समर्थ होती हैं। बताया कि पत्थरों को जोड़ने के लिए कई अलग-अलग साइज की पत्तियों का प्रयोग किया जाएगा।
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