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493 साल बाद रामजन्म की आरती के साक्षी बनेंगे भक्त

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अयोध्या। जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं, तीरथ सकल तहां चलि आवहिं... रामजन्म की भव्यता को दर्शाती रामचरित मानस की पंक्तियां इस रामनवमी पर साकार होती दिखेंगी।
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493 साल बाद रामलला के दरबार में भव्यता पूर्वक रामजन्मोत्सव मनाने की तैयारी है। इस बार रामजन्मोत्सव में त्रेतायुगीन भव्यता दिखेगी तो लगभग पांच सदी बाद पहली बार श्रीरामजन्म की आरती आम भक्त भी शामिल होंगे।
पहली बार रामजन्मोत्सव पर रामलला को छप्पन भोग लगेगा, फूलबंगला झांकी सजेगी। इस दौरान रामनगरी के कण-कण में तो उल्लास होगा ही रामजन्मभूमि परिसर में भी त्रेतायुग जीवंत होता प्रतीत होगा।
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1528 में मुगल आक्रांता बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राममंदिर तोड़ा था। इसके बाद पांच सौ सालों तक अयोध्या मंदिर-मस्जिद के विवाद के चलते संतप्त रही।
1992 की घटना के बाद टेंट में विराजे रामलला को आखिरकार नौ नवंबर 2019 को मुक्ति मिली। सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर के हक में निर्णय दिया।
निर्णय आने के कुछ ही महीनों बाद 24-25 मार्च की रात्रि रामलला को टेंट से निकालकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्वयं अपने हाथों से अस्थाई मंदिर में विराजमान किया।
हालांकि इस बीच कोरोना संक्रमण ने दस्तक दे दी और भव्यता पूर्वक रामजन्मोत्सव मनाने की कामना पूरी नहीं हो पाई। अगले दो सालों तक कोरोना संक्रमण के चलते रामजन्मोत्सव का पर्व सीमित अनुष्ठानों के मध्य परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रहा।
इस बार दो अप्रैल से रामनवमी का पर्व शुरू हो रहा है, ऐसे में रामजन्मोत्सव को भव्यता पूर्वक मनाने की तैयारी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने शुरू कर दी है।
2019 से पहले टेंट में विराजमान रामलला का जन्मोत्सव मनाया तो जाता रहा लेकिन तमाम बंदिशों के चलते न तो श्रद्धालु इसमें शामिल हो पाते थे और न ही कोई विशेष उत्सव होता था, पर अब रामलला अस्थाई मंदिर में ही सही पर ठाठ-बाट से हैं।
हर उत्सव भव्यता पूर्वक मनाया जाता है। अब 493 साल बाद रामजन्मभूमि परिसर में रामजन्मोत्सव पर त्रेतायुग जीवंत करने की तैयारी है।
10 अप्रैल को रामनवमी पर्व पर पहली बार रामजन्म की आरती में भक्त भी शामिल होंगे।
ट्रस्ट इसकी योजना बना रहा है। तैयारी है कि कम से कम 50 भक्त रामजन्म की आरती के साक्षी बन सकेंगे। इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियों से ट्रस्ट चर्चा कर रहा है।
वहीं दूसरी तरफ रामनवमी पर पूरे रामजन्मभूमि परिसर को भव्यता पूर्ण ढंग से सजाया जाएगा। रामलला की फूलबंग्ला झांकी सजेगी, विशेष अनुष्ठान होंगे।
आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि इस बार रामजन्मोत्सव का उल्लास त्रेतायुगीन होगा। चैत्र प्रतिपदा से नवमी तिथि तक गर्भगृह में कलश स्थापना कर अखंड दीप जलाकर देवताओं का आह्वान किया जाता है।
मुख्य पर्व पर रामनवमी के दिन मंदिर की सजावट कर रामलला को पंचामृत स्नान और इत्र का लेप लगाकर नवीन वस्त्र धारण कराया जाता है। अभी तक मुख्य पर्व के दिन तीन प्रकार की पंजीरी, पंचामृत, पकौड़ी, फल और पेड़ा का भोग लगाया जाता रहा है लेकिन इस बार रामलला के जन्मोत्सव पर 56 भोग लगाने की तैयारी है।
उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराकर सोने का मुकुट भी पहनाया जाएगा। कहा कि वह भी इस दृश्य के साक्षी बनने को बेसब्र हैं। इस बार रामजन्मोत्सव में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
इसको लेकर ट्रस्ट रामजन्मोत्सव का लाइव प्रसारण करने की भी तैयारी कर रहा है। क्योंकि रामजन्मोत्सव के समय सभी भक्तों को रामजन्मभूमि में रोकना संभव नहीं है इसलिए लाइव प्रसारण के प्रयास किए जा रहे हैं।
रामनगरी के चौक-चौराहों पर लगी एलईडी स्क्रीन के जरिए रामजन्मोत्सव का लाइव प्रसारण करने पर ट्रस्ट विचार कर रहा है ताकि देश-दुनिया से आने वाले हर भक्त रामजन्मोत्सव का साक्षी बन सके।
रामजन्मोत्सव पर इस बार रामजन्मभूमि में त्रेतायुग का अहसास हो ऐसी तैयारी है। रामलला को पहली बार 56 भोग लगेगा, फूलबंग्ला झांकी सजेगी। साथ ही यह पहला अवसर होगा जब रामजन्म की आरती में भक्त भी शामिल हो सकेंगे, योजना है कि अस्थाई मंदिर परिसर की क्षमता को देखते हुए कम से कम 50 भक्त आरती का हिस्सा बन सके, इसको लेकर ट्रस्ट तैयारी कर रही है। सभी भक्तों को प्रसाद भी बांटा जाएगा।- डॉ. अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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