पूरी दुनिया की निगाह का केंद्र बने डौंडियाखेड़ा में सोने की तलाश में की गई खुदाई में 2 लाख 78 हजार रुपये का खर्चा आया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल के 11 सदस्यों को उत्खनन कार्य में ईसापूर्व से 19वीं सदी तक के पुरावशेष मिले। आरटीआई के तहत मांगने पर पुरातत्व विभाग ने यह जानकारी दी है।
सामाजिक कार्यकर्ता दानिश खां निवासी रामपुर ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से डौंडियाखेड़ा में की गई खुदाई के संबंध में आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी थीं। इसके जवाब में उप अधीक्षण पुरातत्वविद एंव केंद्रीय जन सूचना अधिकारी लखनऊ मंडल इंदु प्रकाश ने जानकारी उपलब्ध कराई है।
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इसके तहत प्राचीन स्थलों की खुदाई करना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का नियमित कार्य है। डौंडियाखेड़ा की खुदाई का निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के अनुरोध पर नहीं लिया गया है। उत्खनन एवं अन्वेषण निदेशक के आदेश के बाद खुदाई का कार्य प्रारंभ किया गया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लखनऊ मंडल के उप अधीक्षण पुरातत्वविद, दो सहायक पुरातत्वविद समेम 11 सदस्य उत्खन कार्य में सम्मिलित हुए।
महानिदेशक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने उत्खनन हेतु चार लाख रुपये और अन्य कार्यों के लिए 30 हजार 50 रुपये स्वीकृत किए थे। उत्खनन कार्य में महज 2 लाख 78 हजार 751 रुपये खर्च हुए। उत्खनन में लगभग प्रथम सहस्त्राब्धि ईसा पूर्व से 19वीं सदी तक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं।
उत्खनन में मिट्टी के बर्तन, कांच की चूड़ियां, पकी मिट्टी के मनके, लोहे की कीलें, तांबे के तार का छोटा टुकड़ा, पत्थर निर्मित खंडित पशु आकृति मिली है।
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सूचना मांगने वाले दानिश खां ने बताया कि जनसाधारण में अंधविश्वास फैलाने की इजाजत व अंधविश्वास से भारत की छवि पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी वाले सवालों को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने से संबधित नहीं बताया है।