उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह 'सिप्पु' और उनके एक समर्थक की शुक्रवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई।
हत्या के बाद पूर्व विधायक के उग्र समर्थक सड़कों पर उतर आए। भीड़ ने दोनों शवों को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया।
उग्र भीड़ ने जीयनपुर थाने में आग लगाने की कोशिश भी की, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान हुई गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई और नौ लोग घायल हो गए।
फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि तीसरी मौत पुलिस की गोली से हुई है या भीड़ की ओर से चली गोली से। डीआईजी और एसपी मौके पर पहुंच चुके हैं।
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, सर्वेश सिंह आज दिन में अपने एक समर्थक भरत राय के किसी मामले को निपटाने के लिए थाने गए थे।
मौके पर ही मौत
वे थाने से लौटकर घर आए और भरत राय से ही बातचीत कर रहे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, सर्वेश और भरत पर दो लोगों ने हमला किया था।
सपा के टिकट पर बने थे विधायक
सर्वेश सिंह सपा के टिकट पर सगड़ी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे। हालांकि बाद में वे बसपा में शामिल हो गए थे। बसपा के टिकट पर ही उन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी।
क्यों हटाई पूर्व विधायक की सुरक्षा
बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जब राज्य में जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी कैसे सुरक्षित रहेगा। राज्य में फैले गुंडाराज के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए जाने चाहिएं।
उन्होंने कहा कि सर्वेश सिंह 2012 में जब बसपा में शामिल हुए थे तो उन्हें सरकारी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी, लेकिन सपा सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली। इससे सरकार के उदासीन रवैये का पता चलता है।
मौर्य ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सपा सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिनिधियों की इस तरह सरेआम हत्या लोकतंत्र की हत्या है।
पूर्व विधायक सर्वेश सिंह के समर्थकों पर पुलिस फायरिंग की निंदा करते हुए मौर्य ने कहा कि इससे सरकार की लापरवाही उजागर होती है। बसपा नेता ने मांग की, कि फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।