चंबल नदी में रेत में बैठे घड़ियाल
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चकरनगर। चंबल अभयारण्य में जलीय जीवों की दूसरे चरण की गणना में दुर्लभ तिलकधारी और सुंदरी कछुआ बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। इन कछुओं के मिलने से विभाग चंबल सेंचुरी में चार चांद लगना मान रहा है। मंगलवार को मुरैंग आगरा बार्डर से 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर गणना सहसो डॉल्फिन सेंटर पर समाप्त हुई। संरक्षित नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन, विभिन्न प्रकार की मछलियां, सुंदरी, कटावा, ढोर दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की संख्या पहले से अधिक आंकी जा रही है।
चंबल सेंचुरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि चंबल में दुर्लभ जलीय जीवों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। यह विभाग के लिए गर्व की बात है। चंबल नदी का ऑक्सीजन युक्त पानी जलीय जीवों के संरक्षण के लिए वरदान साबित हो रहा है। चंबल में जलीय जीवों की संख्या की गणना का कार्य विभागीय टीम और एनजीओ की टीम कर रही है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के माध्यम से वन मंत्रालय को भेजी जाएगी। पहले दिन मुरैंग से लेकर सहसो डॉल्फिन सेंटर तक गणना की गई है। मौसम साफ रहा तो बुधवार को सहसों से पंचनद तक गणना का कार्य किया जाएगा। यह समय कछुओं की हेजिंग का समय चल रहा है। रेती के टीलों में सुरक्षित स्थानों पर कछुए घोंसला बनाकर अंडे दे रहे हैं। चंबल सेंचुरी डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल सेंचुरी में तिलकधारी व सुंदरी प्रजाति के कछुओं संख्या कई वर्षों बाद बड़े पैमाने पर देखने को मिली है। इससे सेंचुरी की ख्याति बढ़ेगी।