चकरनगर (इटावा)। बीहड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी लापता रहते हैं और स्टाफ की कमी से 13 स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हैं। हालत ये है कि उप स्वास्थ्य केंद्र के कई भवन परिसरों और गेट पर घास व झाड़ियां उग आई हैं, कुछ भवन खंडहर हो गए हैं। गर्भवती और बच्चों को टीका लगवाने के लिए 20 से 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
सुगम और सस्ता इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से दो दशक पहले क्षेत्र में 14 उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए थे। ये अस्पताल चकरनगर, गढ़ा कास्दा, भरेह, जगतोली, हनुमंत पुरा, सिंडोस, पिपरोली गढ़िया, अनेठा आदि गांवों में बनाए गए थे। 2021 में चौरेला गांव में नया उपकेंद्र बनाया गया। इन अस्पतालों में स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती नहीं की गई, कागजों पर प्रभार दे दिया गया। स्वास्थ्य कर्मी न होने से 13 उप स्वास्थ्य केंद्र बंद पड़े हैं। केवल चकरनगर और चौरेला के उप स्वास्थ्य केंद्र ही संचालित हैं।
गढ़ा कास्दा गांव के समाजसेवी हेमरुद्र सिंह सेंगर ने गांव का जच्चा बच्चा केंद्र कई वर्ष से बंद पड़ा है। गर्भवती और नवजात को टीका लगवाने के लिए चकरनगर या जनपद औरैया जिले के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।
सीएचसी राजपुर के अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र यादव ने बताया कि तीन एएनएम ही तैनात हैं। एक-एक एएनएम चोरेला व चकरनगर उप केंद्र पर बैठतीं हैं। एक एएनएम सीएचसी में काम देखती हैं। स्टाफ के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।