भरथना (इटावा)। विवौली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में स्वामी बल्लभाचार्य महाराज ने बताया कि अहंकार में अंधा होने वाला विवेक खो देता है। ऐसे व्यक्ति का पतन निश्चित हो जाता है।
ध्रुव चरित्र की कथा कहते हुए महाराज ने बताया कि बच्चों में बाल्यकाल से ही संस्कार देने चाहिए। भगवान किसी गुण अवस्था परिस्थिति पर नहीं रीझते, भगवान को रिझाने के लिए एकमात्र भक्ति ही पर्याप्त है। भक्ति के बिना परमात्मा को प्राप्त करना असंभव है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रमुखत: तीन भरत हुए हैं। इसमें एक कर्मयोगी, एक प्रेमयोगी और एक ज्ञानयोगी हैं। जिनके नाम पर इस अजनाभ वर्ष का नाम भारतवर्ष पड़ा। भारत संपूर्ण विश्व का हृदय है।
प्रहलाद चरित्र की कथा कहते हुए महाराज श्री ने बताया की भगवान सिर्फ खंभे में ही नहीं थे अपितु संपूर्ण सृष्टि के कण-कण में विराजमान हैं। उन्हें प्रकट करने वाला प्रहलाद आज कहीं देखने को नहीं मिल रहा। इसीलिए भगवान समीप होकर के भी अत्यंत दूर है। इस दौरान भागवत कथा पंडाल में कई महिला-पुरुष श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।