निवाड़ीकला। बढ़ते प्रदूषण और खेती में केमिकल के लगातार बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के बहुत से भागों में उपजाऊ मिट्टी लगातार बंजर हो रही है।
ज्यादा रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करने से मिट्टी के जैविक गुणों में कमी आने के साथ उपजाऊ क्षमता में गिरावट आ रही है। भूमि सुधार के लिए तमाम सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
अगर किसानों के खेतों में फसलों के मुताबिक मिट्टी न हो, तो फसलों का अच्छा उत्पादन नहीं मिल पाता है, इसलिए मिट्टी का संरक्षण जरूरी है। मिट्टी के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए ही दुनियाभर में हर साल 5 दिसंबर को विश्व मृदा संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
जिसका उद्देश्य कृषि भूमि को दूषित होने से बचाने के लिए प्रयास और जागरूक करने से है। कोरोना काल के पहले तक विभाग द्वारा प्रति दो हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि का सर्वे किया जाता था।
सर्वे के दौरान जिस क्षेत्र की मिट्टी की गुणवत्ता उपयुक्त नहीं होती थी, किसान को बताया जाता था। यह योजना करीब दो वर्षों से बंद चल रही है। अब किसान अगर अपनी खेत की मिट्टी का परीक्षण कराना चाहता है।
उसे जिला लैब में जाना होगा, जिसमें 29 रुपये खर्च कर भूमि के लिए आवश्यक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर सकता है ।
मुख्य पोषक तत्व की करवा सकते जांच
जिला लैब प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि भूमि में मुख्य पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और पीएच की जांच लैब में की जाती है। किसान मिट्टी का सैंपल लेकर लैब आ सकता है और रिपोर्ट भी उसी दिन उपलब्ध करवा दी जाती है।
जांच से मृदा को कौन से तत्व की अधिक आवश्यकता है, पता चल जाता है। बताया कि विभाग के पीएसबी पाउडर से बीज का ट्रीटमेंट करने पर फसल की पैदावार बेहतर होती है। प्रति 10 किलो बीज में 200 ग्राम का एक पैकेट मिलाने से बीज का ट्रीटमेंट हो जाता है, जो काफी सस्ता भी है।
प्रत्येक तहसील में है लैब
मृदा परीक्षण के लिए जनपद की प्रत्येक तहसील में लैब की सुविधा है, लेकिन काम और स्टाफ की कमी से तहसील स्तर की लैब का काम भी जिला स्तर की लैब से निपटाया जा रहा और तहसील के कर्मचारियों को यही अटैच किया गया है।
पुआल जलाने से दूषित होती है मृदा
खेतों में पुआल जलाने से भी मृदा खराब होती है। भूमि में रासायनिक खादों का कम उपयोग कर जैविक और गोबर की खाद का उपयोग करना चाहिए, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनी रहे। मिट्टी और फसल के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होता है।
-देवेंद्र कुमार, कृषि विशेषज्ञ