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बीहड़ क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी

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चकरनगर। चकरनगर क्षेत्र में डाकुओं की दहशत रही है। आज कोरोना और उसके नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से लोग बुरी तरह से डरे हुए हैं। इसकी वजह है, यहां की लकवाग्रस्त स्वास्थ्य व्यवस्थाएं।
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इस अंचल में 50 हजार की आबादी पर एक 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं और 15 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। इन अस्पतालों के भवन भी बने हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत बहुत निराश करने वाली है।
राजपुर के 30 बेड के अस्पताल में दो डॉक्टर हैं, उनमें से एक नेत्र चिकित्सक अवधेश यादव, दूसरे अधीक्षक सतेंद्र यादव। यहां किसी स्पेशयलिस्ट डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इसके अलावा दो वार्ड ब्वाय, तीन एएनम और चार संविदा कर्मचारियों की तैनाती हैं।
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इनके सहारे ही यहां की व्यवस्थाएं चल रहीं हैं। अस्पताल में एक एक्सरे मशीन है, जिसको चलाने के लिए एक्सरे टेक्नीशियन था। एक्सरे टेक्नीशियन को बकेवर में ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए स्थानांतरित कर दिया गया है।
एक्सरे वाली फिल्म तीन वर्ष से नहीं है और न ही डेवलपर है। अस्पताल में टीबी, एचआईवी जैसी जांचें भी मुश्किल से होती हैं। अस्पताल में सर्जन, फार्मासिस्ट, हेल्थ सुपरवाइजर किसी की भी तैनाती नहीं की गई है।
यदि इमरजेंसी में कोई गर्भवती महिला अथवा कोई अन्य मरीज पहुंचता है तो उसे प्राथमिक इलाज देकर तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कोराना की तीसरी लहर की तैयारियों के नाम पर यहां सिर्फ पांच बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है और पांच ऑक्सीजन सिलिंडर रखे गए हैं।
क्षेत्र के हनुमंतपुरा, गढ़ाकास्दा, पिपरौली गढ़िया तीनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी स्थायी स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती नहीं है। इन केंद्रों का प्रभार ऐसे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया है, जो पहले से ही दूसरे स्थानों पर तैनात हैं।
ये स्वास्थ्य केंद्र नियमित न खुलने की वजह से यहां पर मरीज भी कम ही पहुंचते हैं।
चिकित्सक ढूंढने पर भी नहीं मिलते
ग्रामीण अशोक सिंह, जोगिंदर सिंह, जितेंद्र कुमार, रोहित सिंह, लाल बहादुर, सत्येंद्र कुमार, विनय कुमार प्रदीप सिंह, जगत राम बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल तो बनवा दिए, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारी तैनात नहीं किए गए।
चिकित्सक ढूंढने पर भी नहीं मिलते। गर्भवती महिलाओं को प्रसव और गर्भावस्था के दौरान डॉक्टरी परीक्षण के लिए सरकार ने क्षेत्र में 15 उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की थी। इनमें से मात्र दो चकरनगर, चोरेला के उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहे हैं।
बाकी उप स्वास्थ्य केंद्र एएनएम के अभाव में बरसों से बंद हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गए हैं। क्षेत्र में हेल्थ वेलनेस सेंटर भी खोले गए हैं, लेकिन हेल्थ वेलनेस सेंटर पिपरौली गढ़िया में ताला लटका रहता है।
जिम्मेदार बोले
अस्पताल में स्टाफ की कमी है। एक्सरे टेक्नीशियन का ट्रांसफर बकेवर कर दिया गया है। खून आदि की जांच के लिए पर स्थायी लैब टेक्नीशियन की तैनाती नहीं है।
एचआईवी की जांच टीबी विभाग के संविदा कर्मी एलटी का सहयोग लेकर कराई जाती है। क्षेत्र में 15 उप स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद मात्र पांच एएनएम जिसमें तीन सरकारी व दो संविदा पर हैं।
टीकाकरण अभियान की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर रहती है। यही वजह है क्षेत्र के अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र बंद हैं। गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में बहुत समस्या आती है।
- डॉ. सत्येंद्र यादव, अधीक्षक, तीस शैया अस्पताल, राजपुर
इंसेट---
राजपुर अस्पताल में भी ग्रामीणों के लिए उचित स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। इसको लेकर अधिकारियों से बात की जा रही है। क्षेत्रीय ग्रामीणों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हूं।
-सावित्री कठेरिया, विधायक भरथना
ओमिक्रॉन को लेकर सतर्कता बरतें स्कूल
इटावा। विद्यालयों में पठन पाठन चल रहा है। ओमिक्रॉन का खतरा भी सामने है। इसे लेकर विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को भी पूरी सतर्कता बरतनी है। कोरोना के नियमों का पालन किया जाना है।
यह अपील जिला अभिभावक संघ तथा जनपदीय मातृ संघ ने की है। जिला अभिभावक संघ के अध्यक्ष संजय सक्सेना, उपाध्यक्ष डॉ. आशीष दीक्षित और जनपदीय मातृ संघ की अध्यक्ष नीतू सिंह ने कहा कि ओमिक्रॉन को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जानी चाहिए।
स्कूल प्रबंधन कोरोना के नियमों का पालन करें तथा सैनिटाइजेशन की व्यवस्था करें। संघ के पदाधिकारियों ने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए कोरोना के नियमों का पालन करें।
बच्चों को मास्क लगाकर ही विद्यालय में भेजें। कहा कि हमें सेहत के साथ पढ़ाई के सिद्धांत पर चलना होगा, जिससे बच्चों की सेहत सुरक्षित रहे और पढ़ाई भी चलती रहे।
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