इटावा/सैफई। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने इटावा जिले में 272 करोड़ की लागत से बनी छठवीं केंद्रीय कारागार समेत करीब साढ़े चार अरब से ज्यादा की 48 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
हालांकि, इस दौरान कोई नई घोषणा से पूरी तरह से परहेज किया। इटावा नगर निगम, इकदिल ब्लाक, रूरा यमुना पुल, रामनगर ओवरब्रिज, महेवा नगर पंचायत जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर नजरें इनायत नहीं हो सकी।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह संकेत जरूर दिया कि वे भाजपा सांसद और विधायकों से प्रस्तावों पर काम कर रहे हैं। प्रदर्शनी पंडाल में उन्होंने उद्घाटन और शिलान्यास की 48 शिला पट्टिकाओं का अनावरण किया।
इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, पंचायत, आंगनबाड़ी, मनरेगा, राष्ट्रीय आजीविका मिशन, ग्रामीण स्वच्छता मिशन, पेयजल योजना, नगरीय विकास योजना, दिव्यांग विकास योजना, कृषि विभाग सहित कई अन्य विभागों से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर एक बजकर 56 मिनट पर पुलिस लाइन पर उतरा। यहां भाजपा सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, विधायक सरिता भदौरिया, सावित्री कठेरिया, जिला अध्यक्ष संजीव राजपूत, गोपाल मोहन शर्मा, अन्नू गुप्ता सहित कई प्रमुख भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत किया।
मुख्यमंत्री यहां से सीधे महोला के लिए प्रस्थान कर गए। वहां केंद्रीय कारागार का उद्घाटन करने के बाद 3 बजकर 17 मिनट पर प्रदर्शनी पंडाल पहुंचे। यहां उन्होंने जनसभा को संबोधित किया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे की छठवीं सेंट्रल जेल महोला का फीता काटकर उद्घाटन किया। तय समय से करीब 25 मिनट की देरी से सैफई तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत फूलापुर के गांव महोला में पहुंचे।
जेल परिसर में मुख्यमंत्री ने पौधारोपण भी किया। जेल परिसर के अंदर स्क्रीन लगाकर राजकीय निर्माण निगम के इंजीनियरों ने मॉडल जेल की सीएम को हर एक बिंदु पर समझाया। वहां पर उनके साथ संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना व कारागार राज्यमंत्री जयकुमार जैकी समेत कई नेता व प्रशासनिक अफसर मौजूद रहे।
1942 बंदियों की क्षमता हैं सेंट्रल जेल में
1942 बंदियों की क्षमता वाली यह जेल प्रदेश की छठवीं सेंट्रल जेल होगी। यह जेल कई मायनों में खास है। इसमें 1740 बंदियों के लिए 30-30 बंदियों के लिए 58 बैरक हैं। किशोर बंदियों के लिए दो बैरक और महिला बंदियों के तीन बैरक बनाई हैं।
हर बैरक की क्षमता 30-30 बंदी की होगी। जेल में दो हाई सिक्योरिटी बैरक भी बनाई हैं, जिनमें शातिर व बड़े अपराधियों की कड़ी सुरक्षा में रखा जाएगा। प्रत्येक बैरक में 12-12 बंदी रखे जाएंगे।
2015 में रखी गई थी जेल की नींव
तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार के दौरान 2015 में भूमि खरीदकर आधुनिक जिला जेल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। 51 एकड़ में बनने वाली जेल की डिजाइन बनाकर लागत राशि एक अरब 83 करोड़ 91 लाख रुपये निर्धारित की गई थी।
राजकीय निर्माण निगम ने कार्य शुरू करने से पूर्व सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को डिजाइन दिखाई तो पसंद नहीं आई। उन्होंने कई तरह की सुविधाएं तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए।
इस पर निगम के इंजीनियरों ने नई डिजाइन तैयार करके लागत राशि दो अरब 52 करोड़ 26 लाख रुपये निर्धारित की। अखिलेश सरकार ने यह धनराशि उपलब्ध कराकर दिसंबर 2016 तक निर्माण कार्य पूर्ण करने का समय निर्धारित किया।
उस समय निर्माण कार्य तेजी से शुरू किया गया, लेकिन कार्य पूर्ण नहीं हो सका। मार्च 2017 में सत्ता परिवर्तन होने के बाद निर्माण कार्य की गति और ज्यादा शिथिल हो गई जिससे जो धन उपलब्ध था। उसी से कार्य किया गया।
इसके बावजूद करीब 14 फीसद कार्य शेष रह गया था। इसके लिए बीते दो साल से करीब 20 करोड़ रुपये की मांग शासन से की जा रही थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने वर्ष 2020 में समीक्षा करके इतनी धनराशि की स्वीकृति प्रदान करके बजट निर्धारित कर दिया था।
इससे नई जेल को चमकाने का कार्य तेजी से शुरू करा दिया गया था। जून 2021 में जेल का निर्माण कार्य 272.31 लाख में पूरा हो गया।
उम्रकैद काट रहे कैदी जेल में रखे जाएंगे
सेंट्रल जेल में आसपास के जिलों से जो आजीवन सजा काट रहे कैदी रखे जाएंगे। इसमें जो 10 वर्ष से अधिक सजा काट रहे वह भी कैदी शामिल किए जाएंगे। अब इटावा जिला जेल में कैदियों की संख्या कम होगी और जो कैदी आजीवन सजा काट रहे उनको सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया जाएगा।
ये रहे मौजूद
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी, सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, सदर विधायक सरिता भदौरिया, भरथना विधायक सावित्री कठेरिया, मनीष यादव पतरे, डीआईजी जेल कानपुर वेद प्रकाश त्रिपाठी।
शैलेंद्र कुमार मैत्री डीआईजी मुख्यालय, जेल अधीक्षक इटावा राजकिशोर ,जेल अधीक्षक कन्नौज बालियान सिंह, एसडीएम ज्योत्सना बंधु, नायब तहसीलदार सूरज प्रताप सिंह एवं राजकीय निर्माण निगम की जीएम।
प्रोजेक्ट मैनेजर जनार्दन सिंह, पंकज वर्मा, गिरीश चंद वर्मा, एके सिंह, राजीव भदौरिया, जय चंद्र सिंह, ग्राम प्रधान पंकज यादव आदि रहे।