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बरात न ही रासलीला, सिर्फ रामलीला

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जसवंतनगर। जसवंतनगर की मैदानी रामलीला का 11 दिवसीय कार्यक्रम शुक्रवार को घोषित हुआ। इस बार रामलीला में सिर्फ मेला लगेगा। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, रासलीला व राम बारात के कार्यक्रम नहीं होंगे।
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रामलीला समिति के प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू ने प्रेस वार्ता में बताया कि 161 साल पुरानी यह रामलीला पिछले साल कोरोना के चलते नहीं सकी थी। इस वर्ष प्रशासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए रामलीला कराई जाएगी।
उन्होंने विधायक शिवपाल सिंह यादव का भी आभार जताया, जिन्होंने रामलीला के आयोजन के लिए कमेटी को प्रेरित किया और सहयोग का वादा किया।
इस वर्ष के कार्यक्रम
आठ अक्तूबर को तोलाब मंदिर पर राम वनवास की लीला के साथ महोत्सव शुरू होगा। उसके बाद नौ से 15 अक्तूबर तक मैदान में लीलाएं होंगी। 9 अक्तूबर को भरत मिलाप, 10 अक्तूबर को जयंत आंख फूटना, सूपनखा नाक कटना, खरदूषण वध, रावण-मारीच वार्ता, 11 अक्तूबर को सीता हरण, सुग्रीव मिलाई, 12 अक्तूबर को बाली वध, लंका दहन, अक्षय कुमार वध, 13 अक्तूबर को रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति लीलाएं होंगीं।
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14 अक्तूबर को नाग फांस, मेघनाद-कुंभकर्ण वध तथा 15 अक्तूबर को दशहरा के दिन अहिरावण, रावण वध होगा। 14 और 15 कि इन लीलाओं का प्रदर्शन नगर की सड़कों पर परंपरागत तरीके से होगा। 16 अक्तूबर को तालाब मंदिर पर भरत मिलाप, 17 को नगर भ्रमण और 18 को चौक कटरा पुख्ता में राम राज्याभिषेक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ महोत्सव का समापन होगा।
यूनेस्को ने घोषित किया है विश्वधरोहर
जसवंतनगर। जसंवतनगर की रामलीला काफी प्रसिद्घ है। दिन के समय मैदान में होने के कारण इसका नाम मैदानी रामलीला पड़ा। यहां रात के समय मंच पर लीला प्रस्तुत नहीं होती।
कलाकार मैदान में रामलीला का मनोहारी मंचन प्रस्तुत करते हैं। आसपास के क्षेत्र में इस तरह की यह पहली रामलीला है। इसी खूूबी के चलते यूनेस्को ने वर्ष 2014 में जसवंतनगर की रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया था।
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