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फर्जी विजिलेंस अधिकारी का पिस्टल लाइसेंस हुआ निरस्त

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डीएम ने फर्जी विजिलेंस अधिकारी के पिस्टल का लाइसेंस निरस्त कर दिया। साथ ही कूट रचित दस्तावेजों के सहारे लाइसेंस बनवाने पर उसके खिलाफ कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज हुआ है। गैंग के इस सरगना को पुलिस 13 जून को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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जसवंतनगर थाना क्षेत्र के जगसौरा गांव निवासी गैंग सरगना मनीष कुमार पुत्र रामप्रकाश शर्मा के खिलाफ कलक्ट्रेट में कार्यरत आयुध लिपिक प्रथम सुधीर कुमार ने गुरुवार को मुकदमा दर्ज कराया है।
आरोपी मनीष ने वर्तमान जिलाधिकारी जेबी सिंह के समय में ही पिछले वर्ष 23 सितंबर को फर्जी सिफारिशी पत्र लगाकर पिस्टल का लाइसेंस प्राप्त कर लिया था। तीन सदस्यों के साथ पुलिस की गिरफ्त में आने पर उसकी कारगुजारियों का खुलासा हुआ था।
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पुलिस ने बरामद की लाइसेंस पिस्टल की भी जांच कराई गई। इसमें पता चला कि आरोपी मनीष ने खुद को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में विजिलेंस विंग का डिप्टी कमिश्रर बताया था।
लाइसेंस हासिल करने के लिए उसने मंत्रालय के ही किसी उप सचिव का फर्जी लेटर लगाया था। इसमें उसने विजिलेंस अधिकारी के रूप में तैनात होना झूठा उल्लेख किया था।
आयुध लिपिक ने बताया कि जांच में पत्र के फर्जी पाए जाने पर डीएम जेबी सिंह ने एक जुलाई को उसका शस्त्र लाइसेंस निरस्त करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसी अनुपालन में आरोपी मनीष कुमार के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
ठगी गैंग के इस सरगना को पुलिस ने दो कथित पत्रकारों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनके पास नीली बत्ती लगी इनोवा गाड़ी डिप्टी कमिश्रर दिल्ली का फर्जी परिचय पत्र, साढ़े नौ करोड़ रुपये
और 96 लाख 90 हजार 715 रुपये की रकम भरी सिंडीकेट बैंक के दो ड्राफ्ट, चार फर्जी लेटर पेड, यूपीएससी की फर्जी मैरिट लिस्ट, ई-प्रवेश पत्र, विभिन्न कंपनियों के आठ मोबाइल, पांच टीवी चैनल की माइक आईडी, कई विभागों की नौ मुहरें आदि फर्जीवाड़े से जुड़ा सामान बरामद हुआ था।
करीब साढ़े 10 करोड़ की रकम वाले दोनों ड्राफ्ट भी बैंक जांच में फर्जी पाए जा चुके हैं। गैंग सरगना पर आरोप है कि वह नकली आईआरएस अधिकारी बनकर ठगी करता था। वह सिंडीकेट बैंक में मैनेजर के पद पर भी रहा है।
धोखाधड़ी करने पर उसे पदावनत किया गया। उसके खिलाफ बैंक की विभागीय जांच भी जारी है। एसएसपी के अनुसार गैंग सरगना पहले खुद मुख्यमंत्री के आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाता था, फिर जांच टीम अधिकारी बनकर संबंधितों से रकम ऐंठता था। इसी फर्जीवाड़े के सहारे उसने पिस्टल का लाइसेंस भी बनवा लिया था।
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