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यमुना चंबल का जलस्तर घटने के बाद भी दिक्कतें बरकरार

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फोटो संख्या 26- चिंडौली में पंचायत घर की गिरी बाउंड्रीवाल - फोटो : ETAWAH
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इटावा। एक दिन पानी बढ़ने के बाद चंबल और यमुना का जलस्तर फिर से घटना शुरू हो गया है। इससे राहत और बचाव कार्य में लगे कर्मचारियों को राहत मिली है।
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हालांकि जलस्तर में बार-बार हो रहे उतार-चढ़ाव से बाढ़ से प्रभावित लोगों की चिंता कम नहीं हो रही। बाढ़ प्रभावित चकरनगर और बढ़पुरा ब्लाक के 45 गांवों के लोगों को राशन, पानी, दवाइयां, पशुओं के लिए चारे, रहने के लिए सुरक्षित आवास जैसी मूूलभूत सुविधाओं के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।
चंबल का जलस्तर दो मीटर तक घटा
उदी। रविवार को चंबल का जलस्तर रात 9 बजे 126.88 मीटर पर पहुंचने के बाद कम होना शुरू हो गया। सोमवार को शाम 5 बजे यह करीब दो मीटर तक गिरकर 124.87 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग उदी के स्थल प्रभारी शहजादे खां ने बताया कि फिलहाल जलस्तर में गिरावट जारी है।
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गंदगी से संक्रमण का खतरा
बढ़पुरा ब्लाक के बाढ़ प्रभावित बसवारा, मडै़या पछांयगांव में लोगों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। विनोद सेंगर ने बताया कि गांव में बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ है, लेकिन पानी से गांव में गंदगी इतनी आ गई है कि संक्रमण फैलने का खतरा हो गया है।
यमुना के जलस्तर में भी आने लगी कमी
सोमवार को यमुना के जलस्तर में सुबह के बाद गिरावट शुरू हुई। सोमवार सुबह 8 बजे जलस्तर 121.86 पर पहुंचकर गिरना शुरू हुआ। शाम 5 बजे यमुना का जलस्तर 121.66 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी प्रेम कमल ने बताया कि यमुना के जलस्तर में 8 घंटे में करीब 20 सेंटीमीटर की गिरावट हुई है। यह जारी रहेगी।
बाढ़ में फंसे लोगों को नाव का इंतजार
करनगर। सात दिन से बाढ़ की त्रासदी में फंसे चंबल क्षेत्र के 30 गांव के लोग नदियों के घटते-बढ़ते जलस्तर को लेकर आशंकित हैं। बाढ़ से घबराए ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे हैं।
बाढ़ में फंसे लोग खाने-पीने के सामान की आस में पानी भरे इलाके में आती-जाती नौकाओं को उम्मीद की नजर से देखते हैं। हरौली गांव में हालात गंभीर हैं।
ग्राम प्रधान मनीष दीक्षित बताते हैं कि 200 से ज्यादा लोग तो औरैया जनपद में प्रवास कर रहे हैं। गांव में वही लोग डेरा जमाए हुए हैं, जिनका कहीं कोई आसरा नहीं है। डॉक्टरों की टीम आई और गांव में घूम कर चली गई। जानवर चारे के अभाव में भूखे हैं। बाढ़ के पानी का संक्रमित चारा खिलाना मजबूरी है।
दरोगा जी हमें बचाओ गाड़ी सहित नदी में डूब रहे हैं
चकरनगर। सोमवार को पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला। पुलिस ने नदी में डूबते तीन युवकों को बचाकर सकुशल घर पहुंचाया।
सहसों थानाध्यक्ष गंगादास गौतम को रविवार रात 9 बजकर 07 मिनट पर अज्ञात नंबर से फोन आया।
जिसमें सामने से बोल रहे युवक ने कहा कि दरोगा जी हमें बचा लीजिए, गाड़ी सहित हम सभी लोग कुंवारी नदी में डूब रहे हैं। दरोगा के पूछने पर युवक ने बताया कि चंदहंसपुरा ऊमरी रोड पांडरी बाबा मंदिर के निकट भिंड जाते समय हमारी गाड़ी रास्ते में नदी में डूब गई है।
हमें जल्दी से बचा लो। इसके बाद थानाध्यक्ष ने हनुमंतपुरा चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह को तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना किया। वह भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। युवकों की कार गहरे पानी में जाकर खड्ड में गिर गई थी।
जब पुलिस पहुंची तो तीनों कार के ऊपर बैठकर मदद के लिए चिल्ला रहे थे। पुलिस ने नदी में डूब रहे मोनू भदौरिया निवासी अविनाश नगर थाना कोतवाली सिटी जनपद भिंड, कल्लू प्रजापति, पंकज निवासी बिठौली थाना बिठौली को पानी से बाहर निकाला। पुलिस ने प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें घर भेजा।
पीएचसी में नहीं हुई चिकित्सक की तैनाती
लवेदी। पीएचसी में तैनात चिकित्सक का 27 जुलाई को स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद से यहां कोई चिकित्सक तैनात नहीं किया गया। ऐसे में बाढ़ प्रभावित गांवों के मरीजों को फार्मासिस्ट से ही दवा लेनी पड़ रही है। पीएचसी क्षेत्र में आने वाले गांव चिंडौली, बिझावली, मुचाई, रामगढ़, बसैया कछार, नंदगवां में पानी घुसने से लोगों का आवागमन बंद हो गया है।
60 परिवारों तक पहुंचाई मदद
लवेदी। ग्राम पंचायत टकरुपुर में यमुना का पानी भरने से मजरा कछपुरा, लखनपुरा घार में करीब 60 परिवारों को नाव से खाद्य सामग्री पहुंचा कर बाढ़ में फंसे परिवारों की मदद की गई। इसी तरह ग्राम पंचायत नंदगवां में भी प्रधान व सचिव ने घरों में फंसे 15 लोगों को राहत सामग्री वितरित की।
पुलिस ने भेजी राहत सामग्री
चकरनगर। बाढ़ पीड़ितों को कच्चा-पक्का राशन, बच्चों के खाने-पीने की चीजें व रोजमर्रा से जुड़ी गृहस्थी का सामान हरौली चकरपुरा, पथर्रा, निवी आदि गांवों में थानाध्यक्ष भरेह गोविंद हरी वर्मा तथा उप निरीक्षक राकेश कुमार पटेल ने नाव से भेजा। प्रधानाध्यापक डिभौली ओसान सिंह अपने सहयोगी शिक्षकों की मदद से गांव में बाढ़ पीड़ितों के घरों में राशन सामग्री वितरित की। विद्यालय में खाना बनवाकर बच्चों को खिलाया।
पंचायतघर की बाउंड्री ढही
लवेदी। यमुना का जलस्तर बढ़ने से आठ माह पूर्व मनरेगा से चिंडौली में बनी पंचायत घर की बाउंड्रीवाल धराशायी हो गई। वहीं दो मकानों में दरारें आ गईं।
नाव वाले मछलियां पकड़ने में रहते हैं व्यस्त
बकेवर। यमुना में आए पानी के चलते बाढ़ से प्रभावित एक दर्जन गांवों में लोगों के सामने खाने-पीने की दिक्कतें भी आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप लोगों की समस्याओं से उन्हें बचाने के लिए लगाई गई प्रशासन की नाव लोगों को लाने-आने की बजाय मछली पकड़ने में जुटी रहती है।
गांव बने टापू
ग्राम लखनपुर घार, तीर की मड़ैया, कछपुरा, मड़ैया मल्हान, दिलीप नगर की मड़ैया, पठा, अंदावा की मड़ैया जलभराव के चलते टापू बने हुए हैं। गांवों का संपर्क मार्ग पूरी तरह से कट गया है। लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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ग्रामीण रंजीत वीर सिंह, कोमल सिंह का कहना है कि रविवार को गांव के लोगों को आटा पिसाने जाने के लिए लखना कस्बा भेजने के लिए नाव को इंतजार करते रहे।
कछपुरा के लोगों शीतल, रंजीत, कोमल, वीर सिंह, ने बताया कि नाव वाले ने उनके गांव के लोगों को तीर की मडै़या गांव पर ही उतार दिया। जहां से उनके गांव के लोग आटा की पोटली सिर पर लादकर एक किमी पानी में घुसकर रात 8 बजे घर पहुंचे। तब लोगों के घर खाना बना।

फोटो संख्या 27- हरौली में बाढ़ पीड़ितों को नाव के जरिये रसद सामग्री पहुंचाती भरेह पुलिस- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 25- भरेह मंदिर के आसपास चारों ओर भरा बाढ़ का पानी- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 23- हरौली गांव में पानी भरे घर के बाहर खड़े बच्चे। संवाद- फोटो : ETAWAH

फोटो संख्या 24- बाढ़ प्रभावित गांवों से सुरक्षित स्थानों की ओर पानी में घुसकर जाते ग्रामीण- फोटो : ETAWAH

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