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लाखापुर गांव में गुरुपूर्णिमा पर होती है जानवरों की पूजा

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फोटो संख्या 26- ग्राम कटरा लाखापुर में विशेष अनुष्ठान करते गांव वासी - फोटो : ETAWAH
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इटावा। बसरेहर ब्लाक के ग्राम कटरा लाखापुर सहित एक दर्जन गांव में गुरु पूर्णिमा की मध्य रात्रि में एक विशेष पूजा अनुष्ठान की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम है।
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कार्यक्रम में गांव के सभी लोग एक साथ हिस्सेदारी करते हैं। अनुष्ठान में घर में बंधे पालतू जानवरों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों और महामारी से बचाने के लिए ग्रामीण पूजा करते हैं। एस साल भी यह पूजा हुई।
गांव के आसाराम (70) ने बताया कि इस तरह की पूजा सैकड़ों वर्षों से प्रतिवर्ष गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की मध्य रात्रि पूर्णमासी को होती है। इसे जन्म से ही देखते आ रहे हैं।
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परंपरागत तरीके से गांव के प्रत्येक घर से चंदा लेकर पूजन सामग्री एकत्रित की जाती है। इसदिन सभी ग्रामीण अपने घरों में पूड़ी और पूआ बनवाते हैं। जिसे पूजन में प्रयोग किया जाता है।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा की मध्य रात्रि में यह पूजा देवी मां के पुराने मंदिर पर हवन के साथ पूर्ण होती है। गांव के सभी सदस्य अपने हाथों में बर्तन लेकर प्रसाद सामग्री चढ़ाते हैं।
पूजन पूर्ण होने के बाद हवन की अग्नि को खप्पर में रखकर गांव की सरहद से पूरे गांव की परिक्रमा की जाती है। ताकि गांव में किसी प्रकार की बीमारी प्रवेश न करें, इस बीच रात्रि में ही गांव के सभी जानवरों को वंदन का टीका लगाकर सुरक्षित कर लिया जाता है।
इस तरह का अनुष्ठान आसपास के लगभग एक दर्जन से अधिक गांव में किया जाता है और यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। ग्रामीणों का कहना है इस अनुष्ठान का सर्वाधिक लाभ दूध देने वाली भैंस, गाय, बकरी को विशेष प्रकार से होता है।
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