सैफई। मेडिकल यूनिवर्सिटी के ब्लड बैंक में खून के खेल में कई लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। एसटीएफ खून की तस्करी में गिरफ्तार किए गए सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर से डॉ. अभय प्रताप सिंह से मिली जानकारी के आधार पर यहां भी जांच करने के आ सकती है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक डॉ. अभय के गैंग में सैफई और आसपास के जिलों के कई और लोग शामिल हैं।
ब्लड से प्लाज्मा निकालने का खेल भी पांच वर्ष पहले से चल रहा है। इस बारे में एक निजी कंपनी को ठेका दे दिया गया था। कंपनी ने विश्वविद्यालय में डीप फ्रीजर लगाए थे और मरीजों के खून से प्लाज्मा लेती थी।
इस बारे में उस वक्त एक शिकायत भी की गई थी कि सरकारी अस्पतालों से ब्लड से प्लाज्मा निकलवाने का ठेका निजी कंपनी को किस वजह से किया गया है।
इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब एसटीएफ की जांच में खून की तस्करी के खेल का पूरी तरह पर्दा उठेगा और कई और लोग जांच की जद में आएंगे।
दलालों के माध्य से मिलता ब्लड
इटावा। सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रतिदिन करीब तीन हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। यहां 24 घंटे इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में सेवाएं चलती हैं। यहां इटावा के अलावा आसपास के कई जिलों के मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। अगर मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ जाती है, तो जिंदगी बचाने के लिए दलालों की मदद से ब्लड मिलता है।
सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी में ब्लड बैंक के बाहर दलाल सक्रिय रहते हैं। वह ब्लड बैंक में किसी तीमारदार को आता देख ब्लड देने की बात आपस में करने लगते हैं।
इसके बाद जरूरतमंद को अपने जाल में फंसा दलाल उनसे मोटी रकम लेकर ब्लड की व्यवस्था करा देते हैं। 11 जून 2018 को पैथोलाजी व ब्लड बैंक विभाग में पैसा लेकर ब्लड देने वाले दो ब्लड डोनर पकड़े गए थे। तब ब्लड बैंक के बाहर दलालों का सक्रिय होने का पर्दाफाश हुआ था।