चकरनगर। चकरनगर के बाढ़ प्रभावित गांवों में बदबूदार और कसैला पानी पीने के लिए मजबूर ग्रामीणों को गुरुवार को कुछ राहत मिली। डीएम के निर्देश पर हरौली गांव में टैंकर से पीने का पानी भेजा गया।
हरौली और भरेह समेत बाढ़ प्रभावित कई गांव में पानी कसैला और बदबूदार होने की समस्या को अमर उजाला ने 18 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया।
खबर का संज्ञान लेकर डीएम श्रुति सिंह राजस्व टीम के साथ गुरुवार को भरेह व हरौली गांवों का दौरा किया। डीएम ने गांव में लोगों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों को जल्द समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों के पानी दूषित व कसैला होने की शिकायत पर डीएम ने तत्काल गांव में पानी के टैंकर भेजवाए। ताकि पेयजल के लिए लोगों को भटकना न पड़े। साथ ही वह बीमारी से भी बच सकें।
बिजली संकट, घरगिरी की ग्रामीणों की शिकायतों पर डीएम ने बताया कि जिनके घर गिर गए हैं उनके लिए अभी तिरपाल की व्यवस्था की गई है। जानवरों में बीमारी न फैले उसके लिए डॉक्टरों की टीम लगाई गई है।
बीमारी रोकने के लिए मवेशियों का टीककरण करने के साथ दवाएं दी जा रही हैं। इस दौरान डीएम के साथ सीडीओ संतोष कुमार राय, एसडीएम चकरनगर सत्य प्रकाश, तहसीलदार यदुवीर सिंह यादव, नायब तहसीलदार संदीप सिंह समेत कई अफसर मौजूद रहे।
तेजी से फैल रही खुजली की बीमारी
चकरनगर। गंदे पानी से ग्रामीणों में खुजली की बीमारी बड़े पैमाने पर फैल रही है। 31 गांव में पांच स्वास्थ्य टीमें सचल दस्ते, 20 सी एचओ संक्रमित मरीजों का प्रतिदिन उपचार कर रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर ओपीडी प्रभारी डॉ अवधेश यादव ने बताया कि बाढ़ के गंदे पानी में खुजली की शिकायत बड़े पैमाने पर हो रही।
सरसों के लिए लाभकारी सिद्घ हो रही बाढ़
चकरनगर। बदलते मौसम के चलते ग्रामीण खुले में लेटने से बचें। जिससे कि सर्दी जुखाम बुखार के वायरल से बचा जा सकता है।
सहायक ग्राम विकास अधिकारी कृषि दयाशंकर राठौर ने बताया कि खेतों में बाढ़ के दौरान आई मिट्टी सभी फसलों के लिए लाभकारी होती है सरसों की फसल के लिए तो बेहद लाभकारी है। उर्वरा शक्ति अधिक होने के कारण अच्छी फसल के साथ किसी प्रकार के रोग नहीं उत्पन्न होते हैं। ब्लॉक क्षेत्र में लगभग 2000 हेक्टेयर सरसों वोई जाती है। किसानों को अच्छी सरसों की पैदावार होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
चार घंटे दलदल में फंसा रहा नंदी, टीम ने सुरक्षित निकाला
चकरनगर। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम मिटाहठी गांव के समीप चंबल नदी के दलदल में फंसे नंदी को पुलिस व दमकल विभाग के कर्मचारियों ने चार घंटे रेस्क्यू अभियान के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। बाढ़ प्रभावित गांवों में नदी का दलदल जानवरों के लिए मुसीबत बना है। पालतू व ढिलोरु जानवर चरते हुए नदी की तरफ पानी के लिए जाते हैं। सहसों थाना अध्यक्ष गंगादास गौतम ने बताया साड़ी के दलदल में फंसे होने की सूचना पर दमकल विभाग को बुलाया। ग्रामीणों की मदद से शाम को सुरक्षित बाहर निकाल कर जंगल की तरफ छोड़ दिया गया।
खेतीबाड़ी में जुटने लगे किसान
चकरनगर। यमुना नदी के किनारे स्थित ग्राम लखनपुर घार और कछपुरा में पानी उतरने के बाद लोगों का जीवन बाढ़ त्रासदी के बाद घर झोपड़ी व मकान को दुरुस्त करने और खेतीबाड़ी में लग गए है। ग्राम लखनपुरा निवासी किसान अहिवरन सिंह जिनकी यमुना नदी के किनारे खेतों के पास ही झोपड़ी थी। वही पत्नी श्यामकली के साथ रहते है। खेतों से भी पानी निकलने के बाद अब अहिवरन सिंह बाजरा की बुबाई के लिए जुताई आदि की तैयारी करते नजर आए। श्याम कली कहती हैं कि झोपड़ी बाढ़ में गिर गई। सामान जो बचा सके उसे बच लिया। रहने को सिर छत नही है।
मवेशियों को सूखा भूसा खिलाना पड़ रहा
गांव के ही नरेंद्र सिंह जिनके खेत में खड़ी सब्जी व हरे चारे की जुनरी की फसल नष्ट हो गई। सिंह के पास दो बैल हैं जिनसे खेती करते हैं। बैलों से खेतीं की जुताई कर बाजार की फसल की बुवाई में जुटे थे। नरेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी खेत में खड़ी दो बीघा सब्जियों की फसल व हरे चारे की फसल पानी में पूरी तरफ नष्ट हो गई। बैलों को सूखा भूसा खिलाना पड़ रहा है। बाढ़ में कोई भी सहायता उन्हें नही मिली न ही राशन गल्ला आदि मिला है।
मुआवजे के इंतजार में हैं ग्रामीण
ग्राम लखनपुरा की ही विधवा रामसखी पत्नी स्व गंभीर सिंह का आधा घर बाढ़ में गिर गया है। एक कच्चा मढ़ा गिर गया है। उसके बगल वाला पूरा दरार दे गया है। करीब 15 साल पहले आवास के एक हिस्से में बने कमरे में गुजरा कर रही हैं। घर के बाहर रखा छप्पर बाढ़ में गिर गया। मकान गिरने का कोई मुआवजा अभी तक नही मिला है। लेखपाल, तहसीलदार सर्वे के दौरान नुकसान के ब्योरा लिख कर ले गए थे। नायब तहसील दार संदीप सिंह ने बताया की बाढ़ प्रभावित गांवों में सर्वे का काम अभी अंतिम चरण में है। फाइनल होने पर रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
हरा चारा खाने के लिए छोड़े गए गोवंश
चकरनगर । गोशालाओं में बंद गोवंश को भरपेट चारा न मिलने की स्थिति में जंगल में चराने की छोड़ा गया है। जानवरों को हरा चारा चरने के लिए छोड़े जाने से समस्या बढ़ने लगी है। पशुपालन विभाग के मुताबिक गोशालाओं में बंद गोवंश कुछ समय बाद भूसा खाना छोड़ देते हैं और बीमार पड़ने लगते है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ राहुल शंखवार ने बताया गोशालाओं में जानवरों के खानपान में दिक्कत आ रही थी। वर्तमान में कुछ जानवर बीमार चल रहे हैं उनका उपचार किया जा रहा है।
खेतों में मिट्टी में हुआ गहरा कटाव
बकेवर। यमुना नदी के किनारे के जिन गांवों में बाढ़ आने से किसानों की फसल नष्ट हो गई है। पानी में तेज बहाव के चलते तमाम किसानों के खेतों में मिट्टी का गहरा कटाव हो गया है। कई जगह खेत की मेड़ भी कट गई है। खेतों में तीन चार फीट गहरे गड्ढे हो गए हैं। खेत समतल नही रहे हैं। किसानों को फसल की बुवाई के लिए ट्रैक्टर से कराहा आदि चलवाकर खेतों को समतल कराना पड़ रहा है। जिस पर किसानों को इस संकट के दौर में हजार दो हजार रुपये और अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। किसान नरेंद्र व अहिवरन व शीतल बताते है कि खेतों को बाढ़ के बाद समतल कराने में काफी खर्च हो रहा है और सरकार से कोई सहायता मिली नही हैं। ज्यादातर किसान आर्थिक संकट से घिर गए हैं।
फोटो संख्या 22- खाली पड़ी अनैठा की गोशाला में बाजरे की फसल को भोजन बनाते आवारा गोवंश- फोटो : ETAWAH