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जमीन के दाखिल-खारिज के लिए नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर

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इटावा। जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए लोगों को अब तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्व परिषद ने ऑनलाइन दाखिल खारिज की प्रक्रिया लागू कर दी है। इससे भ्रष्टाचार मिटेगा और अनावश्यक भागदौड़ भी बचेगी।
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अभी तक तहसीलों में दाखिल खारिज की पुरानी व्यवस्था लागू थी। इसमें जमीन का बैनामा कराने वाले को ही तहसील में बैनामे की छायाप्रति जमा करनी होती थी। इसके बाद तहसीलदार स्तर से क्रेता विक्रेता को नोटिस जारी होते थे। निर्धारित समय में कोई आपत्ति न आने पर जमीन का राजस्व अभिलेखों में इंद्राज कर दिया जाता था। अगर कोई आपत्ति दाखिल हो जाती थी तो इसका मुकदमा राजस्व न्यायालय में दाखिल हो जाता था। इस प्रक्रिया में बार बार क्रेता को तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने होते थे। राजस्व संहिता में सामान्य स्थिति में 45 दिन के अंदर दाखिल खारिज करने और कोई आपत्ति होने पर अधिकतम 90 दिन के अंदर निस्तारित करने की व्यवस्था है। परंतु हकीकत में समय ज्यादा लगता है। कभी लेखपाल नहीं तो कभी तहसीलदार नहीं, कभी वकीलों का कार्य बहिष्कार लोगों को महीनों के हिसाब से चक्कर लगाना पड़ते हैं।
प्रक्रिया के ऑनलाइन हो जाने पर किसान या जमीन का बैनामा कराने वालों को अपने सभी कागजात ऑनलाइन ही प्रेषित करने सकेगा। वह घर बैठे ही अपना आवेदन ऑनलाइन कर सकेगा।
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राजस्व आयुक्त एवं सचिव मनीषा त्रिघाटिया ने 27 नवंबर को आदेश जारी किया है। इसमें सभी जिलाधिकारियों को यह व्यवस्था लागू करने के आदेश दिए हैं। यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। कोई भी आवेदक ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। उसका निस्तारण समयबद्ध तरीके से किया जाएगा।
- एन राम, तहसीलदार सदर
तहसीलदार ने बताया कि ऑनलाइन आरसीसीएसए प्रणाली को अपडेट किया गया है। नई प्रक्रिया में निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री के समय ही संबंधित पक्षों से नामांतरण अथवा दाखिल खारिज के लिए शपथपत्र ऑनलाइन आरसीसीएसए पर अग्रसारित किए जाएंगे। यह अग्रसारित होते ही नामांतरण अथवा दाखिल खारिज का वाद दायर हो जाएगा।
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