इटावा। अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नर्सरी स्तर की शिक्षा दी जाएगी। निपुण भारत अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग ने केंद्रों पर पंजीकृत तीन से छह साल तक के बच्चों को नर्सरी स्तर की शिक्षा में निपुण बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। योजना के पहले चरण में बच्चों को पढ़ाने के लिए परिषदीय शिक्षकों को ब्लाक संसाधन केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के लिए 3 लाख 36 हजार 400 रुपये का बजट खर्च किया जाएगा।
अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को सिर्फ पोषाहार ही दिया जाता था। इसके बाद वहां खेल के लिए खिलौनों का इंतजाम किया गया। अब सरकार ने पंजीकृत बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही शिक्षित बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को ही प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर विकसित करने की योजना तैयार की है। इस योजना का लाभ जिले के 1564 केंद्रों पर पंजीकृत 3 से 6 साल तक के 52067 बच्चों को मिलेगा। ये बच्चे अब दलिया, चने की दाल खाते हुए पढ़ाई भी करेंगे।
इटावा। जिले में कुल 1564 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें इटावा शहर में केंद्रों की संख्या 108 है। इनमें से 1238 केंद्र ऐसे हैं जो प्राथमिक अथवा कंपोजिट विद्यालय के कैंपस में ही चल रहे है। इन केंद्रों पर सबसे पहले योजना को शुरू किया जाएगा। इसके बाद अन्य केंद्रों को भी लिया जाएगा।
इटावा। शिक्षकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण को स्कूल रेडीनेस का नाम दिया गया है। प्रशिक्षण में बच्चों को टीएलएम के माध्यम से अक्षर और अंक ज्ञान रोचक तरीके से पढ़ाने के टिप्स दिए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर बेसिक शिक्षा विभाग का एक-एक शिक्षक नोडल बनाया गया है। सभी 1238 नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षित बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अभी शिक्षकों को नोडल शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सभी ब्लाक संसाधन केंद्रों पर प्रशिक्षण चल रहा है। शासन से आदेश आने के बाद यह शिक्षक आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को प्रशिक्षित करने का काम शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। बच्चों को इससे बहुत लाभ मिलेगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, जिला समंवयक प्रशिक्षण
इटावा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों पोषाहार खिलाने के साथ साथ एबीसीडी सिखाने का काम गुरूजी करेंगे। निपुण भारत अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग को केंद्रों पर पंजीकृत तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को नर्सरी स्तर की शिक्षा में निपुण बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के प्रथम चरण में नर्सरी स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए परिषदीय शिक्षकों को ट्रेंड करने किया जा रहा है। ब्लाक संसाधन केंद्रों पर विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्कूल रेडीनेस का नाम दिया गया है। इस प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों पर 3 लाख 36 हजार 400 रुपये का बजट खर्च किया जाएगा।
अभी तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों को सिर्फ पोषाहार ही दिया जाता था। इसके बाद वहां खेल खिलौने का इंतजाम भी किया गया। शिक्षण संबंधी कोई व्यवस्था नहीं थी। भारत सरकार ने पंजीकृत बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही शिक्षित बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री प्राइमरी के रूप में विकसित करने की योजना तैैयार की। इस योजना को निपुण भारत अभियान के रूप में लागू किया गया। इस योजना का लाभ जिले के 1564 केंद्रों पर पंजीकृत 3 से 6 वर्ष तक के 52067 बच्चों को मिलेगा। ये बच्चे अब दलिया, चने की दाल खाते हुए एक बी सी डी भी सीखेंगे।
पहले चरण में लिए जाएंगे 1238 केंद्र
इटावा। जिले में कुल 1564 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें इटावा शहर में केंद्रों की संख्या 108 है। इनमें से 1238 केंद्र ऐसे हैं जो प्राथमिक अथवा कंपोजिट विद्यालय के कैंपस में ही चल रहे है। इन केंद्रों पर सबसे पहले निपुण भारत अभियान संचालित किया जाएगा। इसके बाद अन्यत्र चल रहे केंद्रों को शामिल किया जाएगा।
शिक्षकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
इटावा। प्रि प्राइमरी के बच्चों को पढ़ाने लिखाने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों को दी गई है। उन्हें इसके लिए वाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण को स्कूल रेडीनेस का नाम दिया गया है। प्रशिक्षण में बच्चों को टीएलएम के माध्यम से अक्षर और अंक ज्ञान रोचक तरीके से कराने के टिप्स दिए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर बेसिक शिक्षा विभाग का एक एक शिक्षक नोडल बनाया गया है। सभी 1238 नोडल शिक्षकों को प्रशिक्षित बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शासन के निर्देश के बाद शुरू होगा शिक्षण
इटावा। जिला समंवयक प्रशिक्षण ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि अभी शिक्षकों को नोडल शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। सभी ब्लाक संसाधन केंद्रो पर प्रशिक्षण चल रहा है। शासन से आदेश आने के बाद यह शिक्षक आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को प्रशिक्षित करने का काम शुरू कर देंगे। उन्होंनें कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। बच्चों को इससे बहुत लाभ मिलेगा।