पिता की तरह देश सेवा करने की हसरत रही और प्रयास करने के बाद सफलता मिली है। पिता ने कभी उन्हें यह अहसास नहीं होने दिया कि वह बेटी है, आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसकी प्रेरणा और सहयोग माता-पिता से मिला।
भारत-तिब्बत सीमा बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) की नवनियुक्त असिस्टेंट कमांडेंट दीक्षा ने कहा कि इस सेवा में जाने की प्रेरणा उन्हें अपने इंस्पेक्टर पिता कमलेश कुमार से मिली। जो 32 साल से आईटीबीपी में बतौर इंस्पेक्टर नौकरी कर रहे हैं। इस समय वह पिथौरागढ़ में तैनात हैं।
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दीक्षा के इटावा में पहुंचने पर मां-पिता ने मिठाई खिलाई और स्कूल में एक कार्यक्रम आयोजित कर स्वागत किया गया। दीक्षा ने बताया कि उनकी शुरुआती शिक्षा मसूरी में हुई, नई दिल्ली में इंजीनियरिंग करने के बाद यूपीएससी सेवा में चयन हुआ लेकिन यह रास नहीं आया।
पिता की तरह देश सेवा करने की हसरत रही और प्रयास करने के बाद सफलता मिली है। पिता ने कभी उन्हें यह अहसास नहीं होने दिया कि वह बेटी है, आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसकी प्रेरणा और सहयोग माता-पिता से मिला। पिता कमलेश कुमार ने कहा बेटी को मिली कामयाबी को जिंदगी भर नहीं भूल सकते।
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मुझे अपनी बेटी पर बेहद गर्व है। बताया उनका बचपन संघर्ष से जूझता रहा। आईटीबीपी में जाना सौभाग्य रहा। वह जो न कर सके उसे बेटी दीक्षा ने कर दिखाया। बेटियां किसी से कम नहीं हैं। बेटियों का जो मन करे उसे करने दिया जाए, ताकि बेटियां आगे बढ़ती रहें। मां ऊषा देवी ने कहा जो करो अच्छा करो। दीक्षा ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
जिले के लोगों ने जताई खुशी
दीक्षा को मिली इस बड़ी कामयाबी से इटावा के लोग खुश हैं। जिले की एक बेटी के देश की सीमा की रखवाली करने की जिम्मेदारी करने से लोगों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। दीक्षा के गांव पछायगांव के अलावा शहर की विकास कालोनी के लोगों में हर्ष व्याप्त है। मंगलवार को दीक्षा का विकास कालोनी स्थित लीडर्स इंटरनेशनल स्कूल में स्वागत सम्मान किया गया। प्रधानाचार्य नेहा शाक्य चंद्रा ने उनका सम्मान किया। इस दौरान स्कूल के डायरेक्टर डा.मंजेश कुशवाहा भी शामिल रहे।