चकरनगर। चंबल नदी में शिकारियों के जाल में फंसकर एक तीन साल के नर डाल्फिन की मौत हो गई। सेंच्युअरी अमले ने डाल्फिन का शव बरामद कर लिया है। डाक्टरी परीक्षण के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
इन दिनों चंबल में विदेशी पक्षी काफी संख्या में पहुंचते हैं। इसके अलावा मछलियां, कई दुर्लभ प्रजाति के कछुए, घड़ियाल और मगरमच्छ चंबल में पाए जाते हैं। इनका शिकार करने के लिए शिकारी घात लगाए बैठे रहते हैं।
पहले भी कई बार विभागीय लापरवाही के चलते जलीय जीवों का शिकार किया जा चुका है। चंबल में नर डाल्फिन के शिकार का ताजा मामला तीन से चार दिन पुराना है। ग्राम जगतौली के पास शिकारियों ने जाल लगाया हुआ थ
ा। इसमें कई जलीय जीव फंसने की सूचना पर ग्रामीण पहुंचे तो शिकारी वहां से जाल छोड़कर भाग खड़े हुए। शिकारियों के जाल में फंसने से एक नर डाल्फिन ने दम तोड़ दिया।
शिकार की सूचना पर चंबल सेंच्युअरी की टीम देर से सक्रिय हुई। टीम ने बृहस्पतिवार को डाल्फिन का शव कंधेसी घार बीट से बरामद कर लिया। चंबल नदी में संरक्षित प्रथम श्रेणी का नर डाल्फिन अवयस्क लगभग तीन वर्ष का था और दो बजे के लगभग सेंच्युअरी अमले ने उसे मृत अवस्था में नदी किनारे से बरामद किया।
सेंचुरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि डाल्फिन के शरीर का कोई भी हिस्सा गायब नहीं मिला है, जिससे अनुमान लगाया गया कि मछली के क्षेत्रीय शिकारियों के छोटे जाल में डाल्फिन धोखे से फंस गई होगी। डाल्फिन को देखकर शिकारी जाल छोड़कर भाग गए।
अगर बाहर से जली जीवों का शिकार कर तस्करी के लिए आए होते तो वह डाल्फिन को नदी में छोड़कर नहीं जाते। अज्ञात आधा दर्जन शिकारियों के विरुद्ध डाल्फिन की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी गई है।
डाल्फिन के शव का डॉक्टरी परीक्षण के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उप पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राहुल संखवार ने बताया कि तीन वर्षीय अवयस्क डाल्फिन की मौत लगभग तीन से चार दिन पूर्व होने की आशंका है।
डाल्फिन का शरीर पूरी तरह से सुरक्षित था। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि डाल्फिन का शव मिलने से नदी में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। विभागीय तहकीकात शुरू कर दी गई है।
दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। संरक्षित नदी से चोरी छिपे शिकार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी की गई है।