इटावा। राम कथा व्यक्ति के सभी मनोरथों को सिद्ध करने वाली है। गोस्वामी तुलसीदास ने सबके सुख और जग मंगल के लिए ही श्रीरामचरित मानस को सुलभ किया।
यह बात राहतपुरा स्थित शंकर धर्मार्थ नेत्र अस्पताल में चल रही तीन दिवसीय रामकथा के आखिरी दिन मंगलवार को प्रवचन करते हुए मानस व्यास पंडित कृष्ण प्रताप तिवारी ने कही। रामकथा में चित्रकूट से पधारे रामकथा मर्मज्ञ तिवारी व सह रामकथा वाचक पंडित जगमोहन तिवारी ने मानस के कई प्रसंगों का बड़ा ही सार्थक विवेचन कर हरिकथा के रसिक श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि कलियुग में पाप को मिटाने का सर्वोत्तम उपाय नाम जप है, जो रामचरित मानस के पाठ और राम कथा श्रवण से सुलभ हो जाता है। % व भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नरु और नार। तिन्ह कहं सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरार।
संत और परमार्थी लोग सेवा के माध्यम से दूसरों को सुख बांटते हैं अर्थात परहित बस जिनके मन माहीं। तिन्ह कहं जग दुर्लभ कछु नाहीं। यह काम राहतपुर के दीक्षित परिवार द्वारा शंकर धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय के माध्यम से किया जा रहा है, जो पुण्य का कार्य है।
इससे पहले कथा वाचक आचार्यों का संस्थान के अध्यक्ष डॉ. विद्याकांत तिवारी, मंत्री राजेंद्र दीक्षित, महेश चंद्र तिवारी, केके त्रिपाठी, डॉ. अशोक चौधरी, श्याम सुंदर दीक्षित, विनोद त्रिपाठी, अनुराग असफल, घनश्याम तिवारी, आशा दुबे, प्रियंका दीक्षित समेत तमाम लोगों ने स्वागत व सम्मान किया।