अहेरीपुर गौशाला में बना गोबर गैस प्लांट
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इटावा। 50 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी गोबर से धन नहीं मिल रहा है। परौली रमाइन, अहेरीपुर और कांधनी में गोबर गैस प्लांट ठीक से चालू नहीं हो सके हैं। प्रबंधन न होने से गोशालाओं के आसपास ही गोबर पड़ा रहता है। सरकार की मंशा परवान नहीं चढ़ सकी है।
प्रदेश सरकार ने गोशालाओं की आमदनी बढ़ाने और गोबर प्रबंधन की दृष्टि से गोवर्धन योजना चालू की है। इस योजना में जिले को 50 लाख रुपये की राशि साल भर पहले आवंटित की गई थी। धनराशि से तीन गोशालाओं में गोबर गैस प्लांट लगाकर गोबर से वैकल्पिक ऊर्जा पैदा करनी थी। इससे गोशालाओं को दो तरह से लाभ होता एक तो बिजली का खर्चा बचता और शोधन के पश्चात गोबर का उपयोग खाद के रूप में होता। परौली रमाइन, अहेरीपुर और कांधनी में अभी गोबर गैस प्लांट काम शुरू नहीं कर पाए हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि जिले में छोटी-बड़ी कुल मिलाकर 61 गोशालाएं पहले से संचालित हैं। इनमें 11 हजार 775 गोवंश आश्रय लिए है। इनके चारे व पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। इसी महीने 40 अस्थायी गोशालाएं अतिरिक्त बढ़ाई गई हैं। अब कुल 101 गोशालाएं संचालित हो रही हैं। 1132 गायों को गोद दिया गया है। पशु पालकों को 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चारे का भुगतान किया जाता है। उन्होंने कहा कि परौली रमाइन का गोबर गैस संयंत्र बन चुका है। कांधनी और अहेरीपुर में भी निर्माण कार्य लगभग पूरा है। इन्हें इसी महीने से संचालित कर दिया जाएगा।
महेवा। अहेरीपुर गौशाला में गोबर गैस प्लांट बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अभी चालू नहीं हुआ है। प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश कुमार वर्मा और ग्रामीणों का कहना है कि प्लाटं चालू होने से काफी लाभ मिलेगा। गोशाला में लाइट रहेगी। आसपास के लोगों को कनेक्शन भी दिए जाएंगेे। इकघरा निवासी पशु पालक लालजी दुबे का कहना है कि प्रधानमंत्री ने कानपुर देहात में जनसभा में गोबर बेचकर कमाई का विकल्प देने की बात कही है। किसानों का गोबर तीन रुपये किलो भी खरीदा गया तो पशु पालने में परेशानी नहीं होगी।