आलू के खेत में पानी लगाता किसान
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बकेवर। आलू की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। पहले बुवाई और अब खोदाई में देरी होगी। फसल की लागत भी बढ़ गई है। अब किसानों की नजर आलू के भाव पर है। फिलहाल तो किसानों को आलू का भाव अच्छा नहीं मिल रहा है। आगे भाव अच्छा मिलने की संभावना है।
फर्रुखाबाद, मैनपुरी, फिरोजाबाद और कन्नौज के साथ इटावा में भी आलू की बंपर पैदावार होती है। किसानों के लिए आलू मुख्य फसल है। हालांकि इस साल सरसों का भाव अच्छा रहने की वजह से आलू का कुछ रकबा घटा है। इस वर्ष जनपद में आलू का रकबा 20 हजार हेक्टेअर है। पिछले साल से रकबा लगभग एक हजार हेक्टेयर के बीच कम बताया जा रहा है। आलू का रकबा घटने की एक वजह आलू की बुवाई के बाद हुई बारिश बताई जा रही है। आलू की एक बार फसल बोई जा चुकी थी। उसके बाद बारिश हुई। इससे किसानों को दोबारा बुवाई की नौबत आई।
किसानों ने दोबारा लागत खर्च करने के बजाय कम लागत वाली फसल सरसों की बुवाई कर दी। उस समय बारिश से आलू की अगेती फसल को झटका लगा। उसके बाद बीच में पड़े कोहरे ने आलू की पैदावार को नुकसान पहुंचाया है। आलू का आकार छोटा हो गया है। आलू की खोदाई भी 10 से 15 दिन देर से 25 फरवरी के आसपास शुरू होगी। आलू की बुवाई हर साल 20 अक्टूबर से शुरू होकर नवंबर के पहले सप्ताह में पूरी हो जाती थी। उसी वक्त बारिश होने की वजह से आलू की बुवाई नवंबर के अंत तक होती रही। आलू की फसल 120 दिन से लेकर 140 में तैयार होती है। इस वजह से अब इसकी खुदाई में भी देर हो रही है।