इटावा। बस स्टैंड तिराहे का जाम लोगों के लिए स्थायी मुसीबत बन गया है। यहां पर रोडवेज बसों के स्टाफ की मनमानी से तो जाम लगता ही है, साथ में अतिक्रमण और डग्गामार वाहन भी पूरी सड़क घेरकर खड़े होते हैं।
इटावा से पास के कस्बों के लिए चलने वाले डग्गामार वाहन और बस स्टैंड से शहर के ही दूसरे स्थानों के लिए चलने वाले ऑटो और ई-रिक्शा भी परेशानी का सबब बने हुए हैं।
इनकी वजह से दिनभर जाम के हालात और भी भयावह हो जाते हैं। जाम की वजह से यहां पर कई बार झगड़े की नौबत आ जाती है। हालांकि, रोडवेज बसें स्टैंड के अंदर जाने लगीं हैं, लेकिन उनका सड़क पर खड़ा होना अभी बंद नहीं हुआ है।
बस स्टैंड तिराहा शहर का प्रमुख स्थल है। यहां पर कानपुर की ओर से आने वाली रोडवेज बसें मैनपुरी और दिल्ली की ओर से आने वाली बसें बस अड्डे के लिए जातीं हैं। यहीं पर प्राइवेट बसें भी मुसाफिरों को उतारती और चढ़ाती हैं।
रोडवेज बसों के लिए तो स्थान निर्धारित है, लेकिन प्राइवेट बसें सड़क पर ही मुसाफिरों को छोड़ देतीं हैं और यहीं से यात्रियों को बैठातीं भी हैं। इन मुसाफिरों को यदि दूसरे स्थानों के लिए रोडवेज बस पकड़नी होती है तो तिराहे पर ही इंतजार करते हैं।
बस अड्डे तक जाने की जहमत नहीं उठाते। इन यात्रियों को बैठाने के लिए रोडवेज बसें यहां पर न सिर्फ रुकतीं हैं, बल्कि अन्य मुसाफिरों के आने का भी देर तक इंतजार करतीं हैं। इस वजह से यहां पर जाम के हालात बनते हैं।
डग्गामार वाहन, अतिक्रमण बड़ी समस्या
बस स्टैंड तिराहे पर जब प्राइवेट बसें और रोडवेज बसें यात्रियों को उतारतीं हैं, तो उनको बैठाने के लिए डग्गामार वाहन भी वहीं पर देर तक इंतजार करते हैं। इनके खड़े होने के लिए वहां पर कोई निर्धारित स्थान नहीं है, इसलिए यहीं पर अपने वाहन आड़े तिरछे खड़ा कर देते हैं।
इसके अलावा शहर के अन्य स्थानों पर जाने के लिए आटो और बैटरी रिक्शा चालक भी अपने वाहन यहां देर खड़ा रख सवारियां का इंतजार करते हैं। इसके अलावा बस स्टैंड तिराहे पर अस्थायी दुकानदारों, ठेले और रेहड़ी वाले भी जाम की वजह बनते हैं।
सड़क पर सामान लगाने से आवागमन के लिए रास्ता लगातार संकरा होता जा रहा है।
प्राथमिकता में नहीं समस्या को सुलझाना
बस स्टैंड तिराहे का जाम धीरे-धीरे नासूर बनता जा रहा, लेकिन समस्या को सुलझाना पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं है। यातायात पुलिस के सिपाही और होमगार्ड शहर के दूसरे अन्य चौराहों पर एक से अधिक संख्या में तैनात मिल जाएंगे।
कई ऐसे चौराहे हैं, जिन पर न तो जाम की समस्या है और न ही ट्रैफिक का बहुत अधिक दबाव, लेकिन उन चौराहों से बड़े अफसर गुजरते हैं, तो वहां पर तीन से चार सिपाही और होमगार्ड हमेशा तैनात रहते हैं।
चूंकि यहां पर अधिकारियों आवागमन कम रहता है, इसलिए यहां की समस्या को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
जाम से लोगों का होता समय बर्बाद
फाइनेंस कंपनी में सेल्स का काम देख रहे देव त्रिपाठी ने बताया कि इस तिराहे से दिन में कई बार गुजरना होता है, यहां जाम से समय बर्बाद होता है। दिन में कभी ऐसा नहीं होता कि यहां जाम न मिले।
टेलीकॉम कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर एहसान शेख ने बताया कि रोडवेज बसें और डग्गामार वाहनों की वजह से निकलना मुश्किल होता है। व्यवसायी राहुल यादव कहते हैं कि यहां ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए एक होमगार्ड की तैनाती कर खानापूरी कर ली जाती है।
कभी कोई बड़ा अधिकारी यहां की समस्या को समझे तो समस्या सुलझे भी। उस्मान ने कहा कि जब तक प्रशासन कड़े कदम नहीं उठाएगा, तब तक समस्या नहीं सुलझेगी। बसों की वजह से यहां अधिक जाम लगता है।
स्टाफ की समस्या है। चुनाव की वजह से दूसरे शहरों में भी स्टाफ भेजा गया है। इस वजह से बस स्टैंड तिराहे पर पर्याप्त स्टाफ की तैनाती नहीं हो पा रही है। फिर भी हम समस्या का समाधान करवाएंगे।
- राजकुमार शर्मा, यातायात प्रभारी।