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भूसा हजार के पार, पशुपालकों पर महंगाई की मार

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निवाड़ीकला। महंगाई की मार से अब कोई अछूता नहीं रह गया है। किसानों के साथ ही अब महंगाई ने पशुपालकों की भी कमर तोड़ दी है। पशुओं के भूसे पर महंगाई का असर है। इसके चलते भूसा के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। पशुपालकों की माने तो फसलों की हार्वेस्टर से कटाई भी भूसा का महंगा होना मुख्य वजह है ।
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गेहूं की फसल की कटाई के समय 600 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा अब 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। वहीं, दूध के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे पशुपालकों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है। पशुपालक राम अवतार, अतुल कुमार, अशोक कुमार, रघुवीर ने बताया कि भूसा की महंगाई ने पशुपालकों को चिंता में डाल दिया है। जिन लोगों ने फसल की कटाई के समय भूसा का स्टॉक नहीं किया था। अब ऐसे लोग अब दोगुने दामों में भूसा की खरीद रहे हैं। सस्ते के लालच में किसान अपनी फसलों को हार्वेस्टर से कटवा लेते हैं। इससे भूसे की कमी हो जाती है। व्यापारी और पशुपालक भूसा का स्टॉक कर लेते हैं, वह बाद में महंगी दरों में बेचते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के ज्यादातर किसान गेहूं की फसल को थ्रेसर से काटने के बजाय हार्वेस्टर से कटवाना उचित समझते हैं। थ्रेसिँग से हार्वेस्टर सस्ता पड़ता है । इस प्रक्रिया में भूसा नहीं बनता है। इसके कारण क्षेत्र में भूसा की कमी हो जाती है और महंगाई बढ़ जाती है ।
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पिछले कई वर्षों से हार्वेस्टर से धान की फसल की कटाई कराने के बाद किसान पुआल को खेतों में ही जला देते थे। इस पर लगी रोक सरकार ने इस वर्ष हटा दी है। अबकी बार किसानों ने पुआल कम मात्रा में खेतों में जलाया और उसे पशुपालक अपने पशुओं के लिए चारा के रूप में ले गए ।
भूसा की महंगाई के कारण बाजरे की करब की कीमत भी बढ़ गई है। बीते वर्ष करब के लिए लोग ढूंढे नही मिलते थे। इस बार इसके भी दरें आसमान छू रही हैं। इसकी कीमत प्रति बंडल 50-70 रुपये तक पहुंच गई है ।
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