इटावा/बकेवर/लवेदी। शहर में छैराहा स्थित श्री राधा बल्लभ मंदिर में शुक्रवार को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट उत्सव) शनिवार को श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस मौके पर मंदिर में विराजित श्री राधा बल्लभ, लालजू महाराज, श्रीराधारानी का भव्य और आकर्षक श्रंगार किया गया।
सुबह से लेकर दोपहर तक भजन-कीर्तन की धूम रही। महिलाओं ने नृत्य किया। उधर, भैया दूज का पर्व भी श्रद्धा और उत्साह से जिलेभर में मनाया गया। गाय के गोबर से बनाए गए गोवर्धन महाराज की भक्तों ने पूजा अर्चना की।
गिरिराज भगवान को 56 भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज की परिक्रमा की। इस दौरान वाशिंगटन (अमेरिका) से आए प्रवासी भारतीय उदयवीर सिंह का मंदिर के महंत ने भक्तों से परिचय कराया और उनके बारे में बताया कि वह इटावा के ही रहने वाले हैं।
बताया कि धार्मिक कार्यों में सहयोग करते रहते हैं। गोवर्धन पूजा में विशेष रूप से शामिल होने के लिए इटावा आए हैं। भक्तों ने उनका ताली बजाकर स्वागत किया। मंदिर के महंत गोस्वामी प्रकाश चंद्र ने भक्तों को गोवर्धन पूजा का महत्व और क्यों मनाया जाता है के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
कहा कि गोवर्धन महाराज व गोपूजा विशेष फलदाई है। भगवान गोवर्धन की परिक्रमा करने से सभी के मनोरथ पूर्ण होते हैं। भगवान सभी जीवों की रक्षा करते हैं। भक्तों से कहा सभी को एक बार गोवर्धन जाकर श्रद्धाभाव के साथ परिक्रमा जरूर करनी चाहिए।
कार्यक्रम में महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। उधर, बृज की संस्कृति के सबसे बड़े पर्व गोवर्धन पूजा का पर्व कस्बा बकेवर, लखना समेत ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया।
इस दौरान अन्नकूट का भोग लगाकर गोवर्धन महाराज से संपन्नता एवं सुरक्षा की कामना की गई। बुजुर्ग महिलाओं ने बच्चों को गोवर्धन की कथा सुनाई। 56 व्यंजनों का अन्नकूट बनाकर उससे गोवर्धन महाराज का भोग लगाया गया।
गोवर्धन महाराज को भगवान श्रीकृष्ण का ही रूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्र के द्वारा ब्रज क्षेत्र में भारी बारिश करने से श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर उसके नीचे ब्रज वासियों को शरण दी।
सभी को वर्षा के कोप से बचा लिया। साथ ही इंद्र के घमंड को चकनाचूर कर दिया। उसी की याद में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। कस्बे समेत ग्रामीण अंचलों में यह पर्व परंपरागत तरीके से लोग मनाते रहे हैं।
बहनों ने भाइयों की दीर्घायु की कामना
इटावा/लवेदी/बकेवर। भाई-बहन के परस्पर प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज शनिवार को हंसी खुशी के वातावरण में मनाया गया। दिवाली की दूज का बहुत महत्व है। लिहाजा विवाहित बहनें भाइयों का टीका करने के लिए मायके अवश्य आती हैं।
बहनें भाइयों के मस्तक पर रोली और चावल का टीका लगाकर दोनों हाथ में गरी (सूखा नारियल) का गोला देकर मुंह मीठा करातीं हैं और पान का बीड़ा खिलाकर उनकी दीर्घायु की कामना करतीं हैं।
बदले में भाई रक्षा का वचन देकर उन्हें आदरपूर्वक कोई न कोई उपहार या मुद्राएं देकर बहनों का चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लेते हैं। बहनें बसों अथवा निजी वाहनों आदि से पहुंची।
दिवाली के पर्व से सड़कों पर छाया रहा सन्नाटा शनिवार को टूूटा, जब बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन आते जाते नजर आए। जिला जेल में बंद भाइयों को टीका लगाने के लिए भी महिलाएं बड़ी संख्या में जिला कारागार पहुंची।
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाई का तिलक करने के लिए महिलाएं शाम तक मायके आतीं रहीं।