इटावा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव के भाजपा में जाने से सैफई परिवार से दिल से जुड़े लोगों को धक्का तो लगा है लेकिन वह कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। कुछ ने अपर्णा की राजनीतिक समझा पर सवाल जरूर खड़ा किया। भाजपाई पार्टी को मनोवैज्ञानिक बढ़त तो मान रहे हैं लेकिन वह भी खुलकर प्रतिक्रिया देने के लिए आगे नहीं आए। लोगों से चर्चा में लब्बो लुआब यही निकला कि जमीनी स्तर पर न ही भाजपा को ज्यादा फायदा होगा और न ही सपा को नुकसान।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गांव सैफई में भी चर्चा होती रही। पार्टी से जुड़े बुजुर्ग नेताओं ने कहा कि नेताजी ने पार्टी के खून पसीने से सींचा है। बहू को उनकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए था। चर्चा में सैफई के राजनीतिक परिवार का कोई सदस्य दूसरे पार्टी में जाए इस पर लोगों का दर्द जरूर झलका।
सपा के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। पार्टी कार्यालय में मौजूद एक बुजुर्ग कार्यकर्ता ने युवा कार्यकर्ता से सख्त लहजे में कहा कि हम कार्यकर्ता हैं। पारिवारिक मामलों में किसी चर्चा में नहीं पड़ना है। पार्टी कैसे जीते इस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सपा से जुड़े युवाओं का विचार जरूर कुछ हटकर रहा। युवाओं ने कहा कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है। बड़े-बड़े राजनीतिक घरानों के सदस्य-रिश्तेदार अलग-अलग पार्टियों में राजनीति कर रहे हैं।
बसरेहर में एक व्यक्ति ने कहा कि यह उनके परिवार का मामला है। अपर्णा को सोचना चाहिए था कि पार्टी छोड़कर नहीं जातीं। नेताजी को भी उन्हें समझाना चाहिए था। कुछ लोगों ने अपर्णा की राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अपर्णा के जाने से भाजपा को बहुत अधिक फायदा होने वाला नहीं है। एक युवा ने कहा कि इस बात पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है कि कौन किस पार्टी में जा रहा है। जनता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, कानून व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर वोट डालने जा रही है।
भाजपा और सपा के जिलास्तरीय नेताओं ने भी बयानबाजी से किनारा कर लिया। भाजपा के एक नेता ने कहा कि पार्टी में किसे शामिल करना है किसे नहीं, ये हाईकमान का फैसला है। हम इस पर कुछ नहीं बोल सकते हैं। भाजपाई ने इतना जरूर कहा कि हमें मनोवैज्ञानिक बढ़त जरूर मिलेगी। सपा नेता ने कहा कि हम जनसंपर्क में लगे हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।