चिकित्सा विश्वविद्यालय में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए बनाई गई एलोवैदिक औषधि राज निर्वाण बटी के रेंडमाइजड कंट्रोल्ड ट्रायल (आरसीटी) सफल रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार ने बताया कि अब राज निर्वाण बटी के जल्द ही मरीजों तक पहुंचने की संभावना है। इससे पहले इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से बटी को प्रारंभिक मान्यता दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि इस आरसीटी में कोविड-19 अस्पताल में भर्ती साधारण, मध्यम एवं गंभीर लक्षणों वाले कुल 60 संक्रमित मरीजों को लिया गया जो 18 वर्ष सेे ऊपर आयु वर्ग के थे।
इन 60 मरीजों को दो स्टडी ग्रुपों में बांटा गया। आरएनबी इंटरवेंशन ग्रुप के मरीजों को राज निर्वाण बटी दी गई और प्लेसिबो कंट्रोल ग्रुप को आरएनबी नहीं दी गई।
इन दोनों ग्रुपों के मरीजों को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तहत भी दवाएं दी गईं। इस प्रयोग की खास बात यह रही कि आरएनबी ग्रुप के 60 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जो डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, अस्थमा, कैंसर से भी पीड़ित थे। आरएनबी ग्रुप के मरीजों के स्वास्थ्य में व्यापक सुधार देखने को मिला।
कुलपति प्रो. राजकुमार ने बताया कि वर्तमान में आरएनबी में कुल 11 आयुर्वेदिक दवाओं के घटक हैं। विश्वविद्यालय में कोविड-19 से संबंधित 25 से अधिक शोध-पत्र भी जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि शोध कार्यों में यह देखा गया कि कोरोना शरीर के किन-किन हिस्सों पर पहले अटैक करता है, जिसकी वजह से मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। इसके बाद प्राचीन चिकित्सा की उन दवाओं को छांटा गया जो इन सिस्टम के लिए कारगर हैं।
इस मौके पर प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव, संकायाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार, कुलसचिव सुरेशचंद्र शर्मा, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह, आरसीटी टीम के सदस्य डॉ. रमाकांत रावत, डॉ. आईके शर्मा, डॉ. नरेश पाल सिंह, डॉ. सुशील कुमार शुक्ला आदि मौजूद रहे।
आरएनबी ग्रुप के 97 प्रतिशत मरीज छह दिन और शत प्रतिशत मरीज 12 दिनों में निगेटिव हो गए। जबकि, प्लेसिबो ग्रुप में 73 प्रतिशत मरीज छह दिन और 90 प्रतिशत मरीज 12 दिन में निगेटिव हुए हैं।
आरएनबी ग्रुप के मरीजों को औसतन पांच दिन में आराम मिल गया।
प्लेसिबो ग्रुप के मरीजों को औसतन सात दिन में आराम मिला।