इटावा। शासन से पैसा मिला और 103 दिव्यांगों ने आवेदन किया। स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग की परीक्षा में 45 दिव्यांग पास भी हो गए लेकिन उन्हें शासन की ओर से मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल नहीं मिल सकी। दिव्यांगों के साथ ये कुठाराघात अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हुआ। कई महीने त टेंडर नहीं हो पाए और फिर चुनाव आचार संहिता लग गई। आखिरी में 31 मार्च को 25 लाख रुपये सरेंडर हो गए।
वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल देने की घोषणा की थी। योजना का लाभ 80 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांगों को देना था। 25 फीसदी धनराशि दिव्यांग या समाजसेवी, सांसद विधायक निधि से देने का शासनादेश था। दो साल तक कोई सांसद, विधायक या समाजसेवी किसी दिव्यांग के लिए 25 फीसदी धनराशि देने के लिए आगे नहीं आया। एक भी आवेदन न आने पर नियम पर बदलाव कर निशुल्क ट्राइसाइकिल शासनादेश जारी किया गया।
जिले में 60 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल देने का लक्ष्य मिला। इसके सापेक्ष 103 दिव्यांगों ने आवेदन किया। मेडिकल जांच के साथ ड्राइविंग लाइसेंस देने के लिए परिवहन विभाग ने परीक्षा कराई। इसमें 45 दिव्यांग सफल भी हो गए। यह प्रक्रिया होते होते वर्ष 2021 की पहली छमाही बीत गई। शासन से धनराशि मिलने पर जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय ने पांच बार टेंडर निकाले किंतु किसी निर्माता ने टेंडर नहीं डाला। दिसंबर के बाद विधानसभा चुनावों की आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई।
विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 मार्च को विधान परिषद चुनावों की आचार संहिता लागू हो गई। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से 25 लाख रुपये विभाग ने शासन को सरेंडर कर दिए। जिला दिव्यांगजन सशक्ततीकरण अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि 31 मार्च तक धनराशि का उपयोग न हो पाने कारण धनराशि शासन के पक्ष में सरेंडर कर दी गई है।
अधिकारियों ने बरती लापरवाही
जिला विकलांग एसोसिएशन के मंत्री संतोष कुमार त्रिवेदी ने कहा कि योजना बहुत महत्वपूर्ण थी। अधिकारियों ने संचालन सही तरीके से नहीं किया। दिव्यांग छात्रों के लिए मोटरसाइज्ड ट्राइसाइकिल वरदान से कम नहीं थी। इस तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।