उत्तर प्रदेश के एटा में जिला कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों को जेल के अंदर ही रोजगार मिल रहा है। वह हैंडबैग का निर्माण कर कमाई कर रहीं हैं। इन बंदियों को सरकार की ओर से कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण दिया गया था। इनको कच्चा माल भी जेल में ही मुहैया कराया जाता है।
जेल में सजा काट रही महिलाओं को करीब छह माह पहले कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण दिलाया गया था। इसमें साज-सज्जा (ब्यूटी पार्लर) हैंडबैग आदि शामिल थे, लेकिन महिलाओं की सबसे ज्यादा रुचि बैग बनाने में रही है। इसकी वजह से अच्छा उत्पादन कर बिक्री करके आमदनी की जरिया बन गया है।
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बैगों की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है ऐसे में अगले प्रशिक्षण सत्र में शेष महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा। प्रथम चरण के प्रशिक्षण में 15 महिलाओं को होनहार बनाया गया था जो वर्तमान में निर्माण कर रही हैं। इन महिलाओं के बैग वर्तमान में मुलाकात करने वाले लोग ही खरीद कर ले जा रहे हैं। आकर्षक और टिकाऊ होने की वजह से लोगों को खूब पसंद भी आ रहे हैं।
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जेल में बंदियों की ओर से निर्माण किए जाने वाले सामान को बाहर बाजार देने का प्रयास चल रहा है। इसको लेकर जेल प्रशासन की ओर से कवायद भी की जा रही है। जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि उत्पादन की अपेक्षा बैगों की मांग अधिक है। महिलाएं रुचि भी ले रही हैं। जेल में ही बंदी महिलाओं को रोजगार से सरकार की पहल पर जोड़ा गया है। जो बाहर आकर भी अपना रोजगार शुरू करके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।