एटा। नगर पालिका परिषद में एक कर्मचारी की भर्ती वैक्सीनेटर पद पर की गई। जबकि पालिका में इस पद को खत्म कर दिया गया। बाद में नियम विरुद्ध तरीके से समायोजन कर लिपिक पद पर तैनात कर दिया गया। शिकायत पर पालिका के तीन कर्मचारियों को जांच के आदेश दिए गए, लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।
नगर पालिका परिषद से 1990 में वैक्सीनेटर पद समाप्त कर दिया गया था। जबकि 1998 में पालिका ने इसी पद पर सोवरन सिंह की भर्ती कर ली। इसी साल इसे लिपिक पद पर समायोजित कर दिया गया। इसकी शिकायत नगर पालिका में की गई। अधिशासी अधिकारी ने इसी साल अक्तूबर में तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच सौंपने के निर्देश दिए। ढाई माह बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट अधिशासी अधिकारी को नहीं मिल पाई है।
पालिका के ही कर्मचारी को सौंपी जांच
अधिशासी अधिकारी ने पालिका के कर्मचारी की जांच पालिका के ही कर्मचारी को सौंप दी। जिसके चलते इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तीन सदस्यीय टीम में कर अधीक्षक मुन्नालाल के अलावा राजस्व निरीक्षक मनोज गिरि और लिपिक मनोज शर्मा को शामिल किया गया। जिसमें मुन्नालाल का कहना है कि मुझे अभी तक जांच का आदेश ही नहीं मिला है।