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इन्होंने नहीं किया पॉलिथीन का इस्तेमाल, थैला है इनकी शान

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जागरूकता: हाथ में कपड़े का थैला लेकर घंटाघर बाजार में खरीदारी करते एक बुजुर्ग ।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। आज के दौर में जहां लोग पॉलिथीन के कैरी बैग पर काफी हद तक निर्भर हो चुके हैं। घर से थैला लेकर चलने में झिझकते हैं। वहीं ऐसे लोग भी हैं जो पॉलिथीन का प्रयोग नहीं करते और शान से कपड़े का थैला लेकर चलते हैं।
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जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रेमीराम मिश्रा पॉलिथीन का प्रयोग न कर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे रहे हैं। फल-सब्जी खरीदनी हो या कच्चा राशन आदि, घर से निकलते हैं तो कपड़े के थैले साथ लेकर चलते हैं। कुछ व्यापारी पॉलिथीन में सामान डालकर देते हैं तो उन्हें मना कर पॉलिथीन हटवा देते हैं।
संदेश भी देते हैं किस इस पॉलिथीन के बहुत नुकसान हैं, प्रयोग मत किया करो। ग्राहकों को थैला लाने के लिए बोला करो। हालांकि टीस भी है कि व्यापारी और आम लोग कपड़े के थैलों को भुला चुके हैं और पॉलिथीन पकड़कर चलने में शान समझते हैं। वह कहते हैं कि लोगों को समझाने के लिए दंड विधान का भी कठोरता से पालन किया जाना जरूरी है।
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समाजसेविका डॉ. निरुपमा वर्मा भी कपड़े के थैलों को महत्वपूर्ण मानती हैं। शॉपिंग करने के लिए जाते समय थैला जरूर लेकर चलती हैं। अपने मिलने वाले लोगों, महिलाओं को जागरूक करती हैं कि पॉलीथिन के कैरी बेग से हमें कई तरह के दुष्परिणाम भुगतने होंगे। इसकी शुरूआत भी हो चुकी है। इसलिए घर से कपड़े के थैले लेकर चलें और पॉलिथीन देने वालों को न बोलें, जो लोग नहीं समझ रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होना कोई गलत नहीं है। बाकायदा इसके लिए सरकार ने प्रावधान बनाए हैं, हम सभी को उनका पालन करना चाहिए।
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