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तीन साल में भी पूरी नहीं हो सकी जांच, विवरण भी नहीं दिया

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रोडवेज वर्कशॉप ।संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। परिवहन निगम में 2011 से 2017 तक फ्लीट घोटाला सुर्खियों में रहा। मामले की जांच एडीएम प्रशासन को 2018 में दी गई। शिकायतकर्ता ने जांच का विवरण सूचना का अधिकार के तहत मांगा, वो भी नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता राकेश गौतम ने बताया कि एटा डिपो में 2011 से 2017 तक बड़े पैमाने पर डिपो रिटर्न फ्लीट समीक्षा के दौरान आने वाली बसों को डिपो में खड़ा दिखाकर आय को हड़पा गया। अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्ता के चलते बात दबा दी जाती थी। छह वर्षों में डिपो में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया। वर्ष 2018 में मामले की शिकायत हुई तो कई अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए।
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उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला पहुंचने पर जांच तत्कालीन एडीएम प्रशासन को सौंपी गई। उन्होंने जांच के अंतर्गत मुझे बयान के लिए बुलाया और मामले को लेकर बात की, लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। राकेश गौतम ने बताया कि जांच की प्रगति पता करने के लिए सूचना का अधिकार के तहत डीएम को आवेदन किया। इस पर भी कोई विवरण नहीं दिया गया। मामले को लेकर राज्य सूचना आयोग ने जन सूचना अधिकारी एडीएम प्रशासन को तलब किया गया है।
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