एटा। जिले की अलीगंज विधानसभा सीट पर एटा ही नहीं, आसपास के जिलों की निगाहें भी टिकी रहती हैं। यादव बहुल मतदाताओं के बीच इसे सपा का गढ़ माना जाता है। 1993 से हुए छह चुनाव में चार बार इस पार्टी के प्रत्याशी जीत हासिल कर चुके हैं। 2017 में यहां पहली बार भाजपा का कोई प्रत्याशी जीता था। अब सपा इस सीट पर फिर अपना कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है, तो भाजपा के आगे सपा के गढ़ में दोबारा कमल खिलाने की बड़ी चुनौती है।
इस सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधायक सत्यपाल सिंह राठौर को ही फिर प्रत्याशी बनाकर चुनावी समर में उतारा है। जबकि सपा से उसके पुराने दिग्गज तीन बार विधायक रह चुके रामेश्वर सिंह यादव ताल ठोंक रहे हैं। वहीं बसपा ने युवा नेता सऊद अली उर्फ जुनैद मियां को टिकट दिया है। इनके अलावा कांग्रेस से सुभाष चंद्र वर्मा और आम आदमी पार्टी से राहुल पाठक प्रत्याशी हैं। कुल मिलाकर 12 लोग विधायकी की दौड़ में शामिल हैं। इस सीट की राजनीति को मुद्दों से ज्यादा जातीय संरचना प्रभावित करती है।
बेस वोट के रूप में यादव और मुस्लिम मतदाताओं को साथ लेकर सपा अन्य वर्गों के मतों में सेंध लगाने की कोशिश में जुटी है। जबकि भाजपा की ताकत उसके अपने परंपरागत मतदाता लोधी, वैश्य हैं। वहीं करीब 55 हजार क्षत्रिय मतदाताओं के साथ भाजपा को इन मतों पर भरोसा है। इन परिस्थितियों में यहां शाक्य, ब्राह्मण और एससी मतदाता निर्णायक के रूप में नजर आ रहे हैं। संवाद
चौथी बार आमने-सामने हैं चिर प्रतिद्वंदी
भाजपा और सपा के प्रत्याशी चिर प्रतिद्वंदी हैं। ये लोग तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं। पहले सत्यपाल सिंह राठौर ने रामेश्वर सिंह यादव के सामने 1996 और 2002 में बसपा से चुनाव लड़ा था। दोनों ही चुनाव में उन्हें मात मिली। दल बदलने का फायदा हासिल हुआ। 2017 में भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ उन्होंने रामेश्वर सिंह यादव को करारी शिकस्त दी थी। इस चुनाव में चौथी बार दोनों के बीच कड़ा मुकाबला है।
मतदाताओं का नजरिया
अलीगंज के कैल्ठा निवासी विष्णुकांत शर्मा कहते हैं कि यहां पार्टियों की अदला-बदली तो कई बार हुई, लेकिन सही मायनों में विकास नहीं हुआ। हालांकि अब यहां गढ़ जैसी स्थिति तो नहीं कही जा सकती। मोहल्ला काजी निवासी अब्दुल अहमद का कहना है कि जो उम्मीद थी, इस सरकार में उस तरह के काम नहीं हो पाए। अब मतदाता दूसरी ओर उम्मीद लगा रहे हैं। जैथरा के शास्त्रीनगर निवासी विकास यादव कहते हैं कि इस शासन काल में अलीगंज क्षेत्र पर ध्यान नहीं दिया गया। यहीं के सुमित शाक्य का कहना है कि सपा को बहुत परख चुके हैं, भाजपा को एक मौका और देना चाहिए।