बस के जरिए अपने साथियों संग डेनिपर से रोमानिया बॉर्डर के लिए जाते अर्पित शाक्य। संवाद
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एटा। यूक्रेन के कीव और ओडेसा में फंसे छात्र तो पहले ही परेशान थे। वहीं अब तक सुरक्षित माने जा रहे डेनिपर में भी खतरा बढ़ गया है। वहां फंसे छात्रों को रविवार रात हॉस्टल से बंकरों में भेज दिया गया। सुबह होते ही छात्रों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया। बस, कैव आदि किराए पर करके नजदीकी देशों की सीमाओं पर पहुंचना शुरू कर दिया है।
डेनिपर में फंसे यहां के आवास विकास कॉलोनी निवासी अर्पित शाक्य ने बताया कि चार-पांच दिन अन्य शहरों के मुकाबले डेनिपर में हालात सही थे, लेकिन रविवार रात यहां भी सायरन बज गया। आसपास बम धमाके सुनाई दिए। जिसके बाद सभी को पास के बंकरों में जाने की चेतावनी दे दी गई। हम लोगों ने जागकर डरे-सहमे हुए रात काटी। सुबह सभी साथियों ने मिलकर भाड़े पर एक बस का इंतजाम किया। जिसके माध्यम से रोमानिया बॉर्डर के लिए निकले हैं।
अभी यह नहीं पता कि रोमानिया में प्रवेश कब तक मिलेगा और वहां पर फ्लाइट की क्या स्थिति है? निधौलीकलां रोड निवासी अभिषेक शाक्य भी डेनिपर में हैं। बताया कि रविवार रात बंकर में काटी है। सोमवार को बस के लिए कई बुकिंग एजेंसियों को कॉल किए। बमुश्किल एक बस मंगलवार के लिए मिल सकी। रोमानिया बॉर्डर पर छोड़ने के लिए प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपये किराया लिया गया है। यह बॉर्डर यहां से करीब 1200 किमी दूर है। शांतिनगर निवासी आनंद सिंह ने बताया कि अब हालात बिगड़ने लगे हैं। रात में एक बंकर में भेज दिया गया था। यहां करीब 400 छात्र-छात्राएं थे। जगह काफी कम थी।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से बिस्तर और पानी उपब्ध करा दिया गया। खाने-पीने का जो सामान अपने पास था, ले गए। सुबह के समय हॉस्टल में आ गए। कहा गया है कि बस, कैब के जरिए किसी नजदीकी देश के बॉर्डर पर चले जाएं। जिसकी व्यवस्था कर रहे हैं। शहर के जेल रोड निवासी डॉ. गंगा सिंह कुशवाह ने बताया कि बेटा अभिषेक कुशवाह यूक्रेन के डेनिपर में एक किराये के फ्लैट में रहता है। रविवार रात उसे भी यूनिवर्सिटी के पास बने बंकर में भेज दिया गया। सुबह के लिए बस की बुकिंग हुई है। अभी यह तय नहीं है कि हंगरी, पोलैंड या रोमानिया में से किस बॉर्डर पर भेजा जाएगा।