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फसल बचाने के लिए गोवंशों को दिए जा रहे झटके

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नगला गोकुल के एक खेत में तारबंदी कर प्रवाहित किया गया करंट। संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। किसान निराश्रित गोवंश से परेशान हैं। खेत में खड़ी फसल को बचाने के लिए कई तरह के उपाय करने के बाद भी राहत नहीं मिली तो अब किसानों ने खतरनाक कदम उठाया है। किसानों द्वारा झटका मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। खेत के चारों ओर तारबंदी कर उसमें करंट छोड़ा जा रहा है। जिसके माध्यम से निराश्रित गोवंशों को झटके दिए जा रहे हैं।
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किसान निराश्रित गोवंश से तंग आ चुके हैं। फसल बचाने के लिए दिन-रात खेत में बैठकर रखवाली करनी पड़ रही है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कई किसान बैटरी से संचालित एक मशीन खेतों में लगवा रहे हैं। जो झटका मशीन के नाम से मशहूर हो गई है। खेतों के चारों ओर लोहे के तार बांधकर इनमें मशीन के जरिए करंट छोड़ा जा रहा है। जिससे खेत में घुसने की कोशिश करने वाले पशु को करंट के झटके लगते हैं। झटके लगते ही पशु खेत के चारों ओर लगे तारों से दूर भाग जाते हैं। किसानों का दावा है कि इससे हल्का करंट निकलता है, जिससे पशु की मौत नहीं होती है।
पांच हजार रुपये तक करने पड़ते है खर्च
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी फसल को निराश्रित गोवंश से बचाने के लिए झटका मशीन का प्रयोग कर रहे हैं। यह मशीन बाजार में करीब तीन हजार रुपये की आ रही है। जबकि करीब दो हजार रुपये का तार लग जाता है।
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नगला गोकुल में अधिकांश किसानों ने लगवा लीं मशीनें
शहर से सटे गांव नगला गोकुल में अधिकांश किसान अपने खेत की रखवाली के लिए झटका मशीन का प्रयोग कर रहे हैं। यहां हर खेत के चारों ओर तारबंदी कर दी गई है और झटका मशीन से तार जोड़े एए हैं।
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