एटा। कचहरी में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के फर्जी वकालतनामा प्रकरण में बड़ा घोटाला पकड़ा गया था। 2014 से जाली वकालतनामे छपवाकर कचहरी में बिक्री किए जा रहे थे। कोतवाली नगर में तीन लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। एक लिपिक को नामजद किए जाने पर एडब्ल्यूएफ के कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे।
31 जनवरी से यह मामला तब उछला, जब एक स्टांप वेंडर के यहां से फर्जी वकालतनामा पकड़ा गया। इस पर कुछ अधिवक्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बार-अध्यक्ष और सचिव को जानकारी दी। इसके बाद मामले में समिति गठित कर जांच शुरू करा दी गई। जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से फर्जी वकालतनामे पाए गए। कुल 2332 वकालतनामे फर्जी पकड़े गए। जिनकी कीमत के हिसाब से अधिवक्ता कल्याण कोष और बार को करीब 69 लाख रुपये का घाटा हुआ। मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं के बीच काफी हलचल भी रही। पक्ष और विपक्ष में अधिवक्ता बंटे हुए दिखाई दिए। इस पूरे प्रकरण में अधिवक्ता कल्याण कोष के कई पूर्व अधिकारी भी फंसते नजर आ रहे थे।
इसे लेकर जांच कमेटी के अध्यक्ष आदित्य मिश्रा एडवोकेट ने कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसमें स्टांप वेंडर अजय और धीरज सहित अधिवक्ता कल्याण कोष के लिपिक लालजीत को नामजद किया गया है। जांच कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि स्टांप वेंडर पर ये फर्जी वकालतनामे पकड़े गए थे। जबकि पूछताछ के दौरान इन लोगों ने लालजीत का नाम लिया था। इसी आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वहीं साथी कर्मचारी पर रिपोर्ट लिखे जाने से क्षुब्ध अधिवक्ता कल्याण कोष के सभी कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को हड़ताल रखी। कोतवाली नगर प्रभारी निर्दोष सिंह सेंगर ने बताया कि जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी गहनता से जांच कराई जाएगी।