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नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन के नाम की हुईं कुरआन ख्वानी

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कासगंज के भरगैन में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन के नाम की कुरआन ख्वानी करते लोग - फोटो : KASGANJ
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भरगैन। कस्बे में नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को लेकर इबादत और तिलावत का सिलसिला जारी है। करबला के शहीदों की याद में जगह-जगह जिक्र-ए-इमाम हुसैन, कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी हो रहीं हैं। रविवार को भरगैन के मुहल्ला अहमद थोक स्थित मरहूम दावर अली फौजी द्वारा शोहदा-ए-करबला के नाम की कुरआन हुई।
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उलेमा हाफिज जुबेर खान ने कहा कि कत्ले हुसैन असल में मरग-ए-यजीद है। हर करबला के बाद, इस्लाम जिंदा होता है। एमआर खान ने बताया कि करबला की जंग में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हर धर्म के लोगों के लिए मिसाल है। यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए। सच्चाई के लिए बड़े से बड़े जालिम शासक के सामने भी खड़ा हो जाना चाहिए। इस मौके पर हाफिज गुलाम नवी, हाफिज मुहम्मद जुबैर अहमद खान, हाफिज मुहम्मद उमर, हाफिज कुद्दूस आलम, मास्टर नूर आलम खान, मास्टर अलियार अहमद खान, मास्टर बहार आलम खान, रिहान खान, मोईन खान, आमिर खान रहे।
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