एटा। जी हां, यह हाल मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा सेवाओं का है। यहां मरीजों के लिए पंजीकरण शुल्क के नाम पर महज एक रुपये का पर्चा बनाया जा रहा है। जो सुनने में काफी सस्ता लगता है, लेकिन कई दवाओं व जांचों की सेवा उपलब्ध न होने से मरीजों को इलाज में करीब 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। कॉलेज प्रशासन बता रहा है कि मार्च के बाद से बजट ही नहीं मिला है। जिसके चलते दवाओं के ऑर्डर तक नहीं दे पा रहे हैं। जो दवाएं पिछले वित्त वर्ष की खरीद की हैं, उनसे ही काम चलाया जा रहा है।
मरीज बोले, बाहर से खरीदनी पड़ी दवा
केस 1: शहर से सटे वनगांव निवासी ओमकार सिंह को पथरी की समस्या है। जांच कराने मेडिकल कॉलेज आए। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड लिख दिया। लेकिन यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। बाहर एक निजी केंद्र पर 800 रुपये में कराने के बाद रिपोर्ट लाकर चिकित्सक को दिखाई। उन्होंने चार दवाएं लिखीं, जिनमें से दो ही मिलीं। अन्य दो दवाएं बाहर से 200 रुपये की खरीदीं।
केस 2: शहर के आगरा रोड के ही रहने वाले मुनेश चंद्र शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में घुटनों के दर्द की दवा लेने गए। एक रुपये का पर्चा बना। उम्मीद थी कि अन्य इलाज भी मुफ्त या सस्ता मिलेगा। चिकित्सक ने तो मुफ्त में देखकर दवा लिख दीं, लेकिन चार में से तीन दवाएं ही मिलीं। एक दवा बाहर से खरीदी जो 150 रुपये की आई।
केस 3: गांव रुद्रपुर से आए गगन के पैर में चोट लगने से सूजन थी। चिकित्सक ने परीक्षण कर पर्चे पर चार दवाएं लिख दीं। एक दर्द निवारक ट्यूब भी लिखा, लेकिन न तो ट्यूब मिला और न दवा ही पूरी मिल सकीं। केवल दो दवाएं देकर अन्य को बाहर से लेने के लिए बोल दिया गया। मेडिकल स्टोर से शेष दवाएं 300 रुपये की खरीदकर ले गए।
केस 4: पुरानी बस्ती निवासी ओमकार सिंह को दांतों में दर्द की समस्या है। सुना था कि अब जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज हो गया है। यहां मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे। पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सक के कक्ष में नंबर आने तक कतारों में जद्दोजहद की। चिकित्सक ने परीक्षण कर एक चिकित्सकीय दंत मंजन लिख दिया, लेकिन यह काउंटर पर उपलब्ध नहीं था। बाहर 180 रुपये का बताया गया।
इन दवाओं की कमी
यूं तो मेडिकल कॉलेज में कई दवाओं की कमी चल रही है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत वाली दवाओं में दर्द निवारक ट्यूब, ओआरएस, एंटीबायटिक, बुखार, गैस, दर्द खुजली की दवाएं नहीं हैं। चीफ फार्मासिस्ट नरेश शाक्य ने बताया कि मेडिकल कॉर्पोरेशन पर हम दवाओं के ऑर्डर बुक करते हैं, लेकिन बजट न होने पर पोर्टल ऑर्डर दर्ज ही नहीं कर रहा। 72 तरह की दवाओं की सूची बनाकर कॉलेज प्राचार्य को दी है।
ेडिकल कॉलेज के दवा वितरण केंद्र पर दवा न होने के कारण कम संख्या में खड़े मरीज ।संवाद- फोटो : ETAH