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अपने लाडलों को देख भावुक हुए माता-पिता, छलक पड़े आंसू

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एटा। लॉकडाउन के कारण घर से पांच सौ किलोमीटर दूर राजस्थान के कोटा में फंसे अपने लाडले को देख कर माता-पिता भाुवक हो गए। उनके आंखों से अश्रुधारा बहने लगी। बेटे को घर तक पहुंचाने पर उन्होंने सरकार का साधुवाद दिया है। उधर, कोटा से यहां पहुंच 48 छात्र-छात्राएं की थर्मल स्क्रीनिंग हुई।
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इसके बाद उन्हें 14 दिन तक होम क्वारंटीन रहने के निर्देश दिए गए। घर के बाहर प्रशासन की ओर से पैम्फलेट चस्पा भी करा दिया गया है, जिससे उनके बेटे से कोई मिलने न आ सके। कोटा में फंसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को लेने के लिए जिले से भी करीब 15 बसें सैनिटाइज कर भेजी गईं थीं।
वहीं अन्य जनपदों से भी बसें भेजी गईं, यह बसें सुबह पांच बजे के बाद जैसे ही बस स्टैंड पर पहुंचना शुरू हुईं। पूरे बस स्टैंड को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी अभिरक्षा में ले लिया। जिलों की करीब नौ बसें अब तक एटा बस स्टैंड पर पहुंचीं हैं। जिले के करीब 48 छात्र-छात्राएं सवार थे।
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बसों में सामाजिक दूरी का पालन करने के चलते एक-एक बस में पंद्रह से बीस बच्चे ही सवार थे। इनसे भी प्रशासन ने कोटा से यहां तक का किराया नहीं लिया। इस दौरान बस स्टैंड पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अपनी एंबुलेंस लगा दी। इसमें बैठे डॉक्टर्स और स्टाफ ने प्रत्येक छात्र का नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि नोट करने के साथ उसकी थर्मल स्क्रीनिंग की और हिदायत के पैम्फलेट के साथ सभी के स्वस्थ होने पर उन्हें घर भेज दिया।
देहात के बच्चों को आई समस्या
कोटा से बसें छात्रों को लेकर एटा तक तो आ गईं, लेकिन यहां से देहात क्षेत्र के छात्रों को छोड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इन छात्रों को कठिनाइयों के साथ घर तक पहुंचना पड़ा। किसी ने परिजनों को बुलाया तो कोई पैदल ही निकल पड़ा।
आईटीआई की तैयारी करने गया था
-कोटा में आईटीआई की तैयारी करने गया था, लॉकडाउन का पहला चरण तो जैसे-तैसे बीत गया। दूसरे में दिक्कत के साथ ही दिल में अनजाना सा डर लगने लगा। अब सकून है। - दीपक यादव, अवागढ़ निवासी।
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मरीजों की संख्या बढ़ने से डर लगने लगा था
-आईआईटी करने गए थे। कोरोना वायरस के देश में मरीजों की संख्या बढ़ने से यहां रहते समय डर लगने लगा, पता नहीं लॉकडाउन कितने दिन और रहेगा, घर की याद आने लगी। सचिन यादव, श्रृंगार नगर।
हॉस्टल में रसोई का सामान होने लगा था खत्म
लॉकडाउन में हॉस्टल में भी रसोई का सामान खत्म होने लगा था। पिछले तीन-चार दिन से खाना भी ठीक नहीं मिल रहा था। वहीं परिवार को उनकी चिंता हो रही थी। सरकार ने बस भेजी आ गए। -सचिन यादव, श्रृंगार नगर।
दो जगह बसें बदलनीं पड़ीं
कोटा से एटा तक बड़ी मुश्किल से आ पाए हैं। दो जगह तो बसें बदलनीं पड़ीं, जगह-जगह घंटों लाइन में लगकर स्क्रीनिंग करानी पड़ी, घर वालों की याद आ रही थी। अब सुकून से रहेंगे घर पर। -अभिषेक, शांति नगर।
किसी भी छात्र-छात्राओं में नहीं मिला बीमारी का लक्षण
कोटा से जितने भी छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। उन सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कराई जा रही है। दो बार बस स्टैंड का निरीक्षण किया। अभी तक किसी भी छात्र में किसी भी तरह की बीमारी का लक्षण नहीं मिलने पर उन्हें हिदायत के साथ घर भेजा जा रहा है। -डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ
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