कासगंज रोड पर जमा की गई काली नदी की बालू ।
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एटा। काली नदी से अवैध रूप से खनन पर प्रशासन अंकुश नहीं लगा सका है। माफिया यहां से निकाली बालू दुकानों पर बेचने के अलावा सरकारी परियोजनाओं में भी खपा रहे हैं। यहां पहुंचते ही कागजों में इसका दाम दोगुने से भी ज्यादा हो जाता है।
चार थाना क्षेत्रों के अंतर्गत इस नदी के किनारों पर रात से लेकर भोर तक जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए खनन किया जाता है। इस बालू की मांग अन्य जिलों में नहीं है। आमतौर पर यहां से निकली बालू को आसपास के सड़क किनारे दुकानदारों को बेच दिया जाता है।
करीब 2500 रुपये में एक ट्रॉली बालू दी जाती है। जो निजी निर्माण कराने वालों केे बेच दी जाती है। लेकिन इससे आगे बढ़कर भी खेल चल रहा है। कई नाले, इंटरलॉकिंग, शौचालय, आंगनबाड़ी केंद्रों सहित अन्य कई निर्माण कार्यों में इस बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी इस्तेमाल में दिखाते ही इसका दाम 56 रुपये प्रति घनफुट हो जाता है। सबकी निगाहों से बचाने के लिए बालू आपूर्ति का खेल रात में या तड़के किया जाता है।
काली नदी से निकलने वाली बालू की गुणवत्ता ठीक नहीं है। यदि इस बालू को जिले में किसी सरकारी कार्य में प्रयुक्त किया जा रहा है तो पड़ताल कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुनील कुमार सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व